24 दिसंबर 2028 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 24 दिसंबर 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 24 दिसंबर 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (19:00 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (22:34 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:08 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 17:36 से 19:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:08 – 19:23
रात 05:09 तक
तिथि
अष्टमी, 19:00 तक
नवमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 22:34 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 दिसंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 19:00 तक
शुक्ल नवमी 21:24, 25 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 01:21, 26 दिस॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 05:43 तक
वरीयान 06:31, 25 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 05:44 तक
बव 19:00 तक
बालव 08:14, 25 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:08
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
12:35
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
14h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
17:36 – 19:23
यमगंड
12:16 – 14:03
गुलिक काल
15:49 – 17:36

24 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:08 – 06:55टालें
चर06:55 – 08:42सामान्य
लाभ08:42 – 10:29शुभ
अमृत10:29 – 12:16शुभ
काल12:16 – 14:03टालें
शुभ14:03 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:36टालें
उद्वेग17:36 – 19:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:23 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:03सामान्य
रोग23:03 – 00:16टालें
काल00:16 – 01:29टालें
लाभ01:29 – 02:42शुभ
उद्वेग02:42 – 03:56टालें
शुभ03:56 – 05:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0806:20दिन
शुक्र06:2007:31दिन
बुध07:3108:42दिन
चंद्र08:4209:53दिन
शनि09:5311:04दिन
गुरु11:0412:16दिन
मंगल12:1613:27दिन
सूर्य13:2714:38दिन
शुक्र14:3815:49दिन
बुध15:4917:01दिन
चंद्र17:0118:12दिन
शनि18:1219:23दिन
गुरु19:2320:12रात
मंगल20:1221:01रात
सूर्य21:0121:49रात
शुक्र21:4922:38रात
बुध22:3823:27रात
चंद्र23:2700:16रात
शनि00:1601:05रात
गुरु01:0501:54रात
मंगल01:5402:42रात
सूर्य02:4203:31रात
शुक्र03:3104:20रात
बुध04:2005:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2619° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।