29 जनवरी 2029 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 29 जनवरी 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 29 जनवरी 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (16:23 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (16:12 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 19:20 पर है। राहुकाल 07:21 से 09:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 19:20
रात 05:39 तक
तिथि
चतुर्दशी, 16:23 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
पुनर्वसु, 16:12 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 जनवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 16:23 तक
पूर्णिमा 14:03, 30 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 14:33, 30 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 07:33 तक
प्रीति 04:36, 30 जन॰ तक
आयुष्मान 01:17, 31 जन॰ तक
करण
वणिज 16:23 तक
विष्टि (भद्रा) 03:17, 30 जन॰ तक
बव 14:03, 30 जन॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 10:32 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
19:20
चंद्रोदय
18:34
चंद्रास्त
04:14
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
07:21 – 09:04
यमगंड
10:46 – 12:29
गुलिक काल
14:12 – 15:54

29 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:38 – 07:21शुभ
काल07:21 – 09:04टालें
शुभ09:04 – 10:46शुभ
रोग10:46 – 12:29टालें
उद्वेग12:29 – 14:12टालें
चर14:12 – 15:54सामान्य
लाभ15:54 – 17:37शुभ
अमृत17:37 – 19:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:20 – 20:37सामान्य
रोग20:37 – 21:54टालें
काल21:54 – 23:12टालें
लाभ23:12 – 00:29शुभ
उद्वेग00:29 – 01:47टालें
शुभ01:47 – 03:04शुभ
अमृत03:04 – 04:22शुभ
चर04:22 – 05:39सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3806:47दिन
शनि06:4707:55दिन
गुरु07:5509:04दिन
मंगल09:0410:12दिन
सूर्य10:1211:20दिन
शुक्र11:2012:29दिन
बुध12:2913:37दिन
चंद्र13:3714:46दिन
शनि14:4615:54दिन
गुरु15:5417:03दिन
मंगल17:0318:11दिन
सूर्य18:1119:20दिन
शुक्र19:2020:11रात
बुध20:1121:03रात
चंद्र21:0321:54रात
शनि21:5422:46रात
गुरु22:4623:38रात
मंगल23:3800:29रात
सूर्य00:2901:21रात
शुक्र01:2102:13रात
बुध02:1303:04रात
चंद्र03:0403:56रात
शनि03:5604:48रात
गुरु04:4805:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2633° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।