8 फ़रवरी 2029 को पर्थ का पंचांग

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (15:15 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (23:22 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 14:11 से 15:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 19:12
रात 05:48 तक
तिथि
दशमी, 15:15 तक
एकादशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 23:22 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 15:15 तक
कृष्ण एकादशी 15:04, 9 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मूल 23:56, 9 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 19:03 तक
हर्षण 17:46, 9 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:15 तक
बव 03:06, 9 फ़र॰ तक
बालव 15:04, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
00:36
चंद्रास्त
15:24
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
14:11 – 15:51
यमगंड
05:48 – 07:28
गुलिक काल
09:09 – 10:49

8 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:48 – 07:28शुभ
रोग07:28 – 09:09टालें
उद्वेग09:09 – 10:49टालें
चर10:49 – 12:30सामान्य
लाभ12:30 – 14:11शुभ
अमृत14:11 – 15:51शुभ
काल15:51 – 17:32टालें
शुभ17:32 – 19:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:12 – 20:32शुभ
चर20:32 – 21:51सामान्य
रोग21:51 – 23:11टालें
काल23:11 – 00:30टालें
लाभ00:30 – 01:50शुभ
उद्वेग01:50 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:29शुभ
अमृत04:29 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4806:55दिन
मंगल06:5508:02दिन
सूर्य08:0209:09दिन
शुक्र09:0910:16दिन
बुध10:1611:23दिन
चंद्र11:2312:30दिन
शनि12:3013:37दिन
गुरु13:3714:44दिन
मंगल14:4415:51दिन
सूर्य15:5116:58दिन
शुक्र16:5818:05दिन
बुध18:0519:12दिन
चंद्र19:1220:05रात
शनि20:0520:58रात
गुरु20:5821:51रात
मंगल21:5122:44रात
सूर्य22:4423:37रात
शुक्र23:3700:30रात
बुध00:3001:23रात
चंद्र01:2302:16रात
शनि02:1603:09रात
गुरु03:0904:02रात
मंगल04:0204:55रात
सूर्य04:5505:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2636° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।