8 सितंबर 2029 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 8 सितंबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 8 सितंबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (18:44 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (02:37, 9 सित॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 09:19 से 10:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 18:04
रात 06:23 तक
तिथि
अमावस्या, 18:44 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 02:37 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 18:44 तक
शुक्ल प्रतिपदा 15:27, 9 सित॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 02:37, 9 सित॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 00:04, 10 सित॰ तक
योग
सिद्ध 13:15 तक
साध्य 09:30, 9 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 08:16 तक
नाग 18:44 तक
किंस्तुघ्न 05:07, 9 सित॰ तक
बव 15:27, 9 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
05:51
चंद्रास्त
18:01
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
09:19 – 10:47
यमगंड
13:41 – 15:09
गुलिक काल
06:24 – 07:52

8 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:24 – 07:52टालें
शुभ07:52 – 09:19शुभ
रोग09:19 – 10:47टालें
उद्वेग10:47 – 12:14टालें
चर12:14 – 13:41सामान्य
लाभ13:41 – 15:09शुभ
अमृत15:09 – 16:36शुभ
काल16:36 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:04 – 19:36शुभ
उद्वेग19:36 – 21:09टालें
शुभ21:09 – 22:41शुभ
अमृत22:41 – 00:13शुभ
चर00:13 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:18टालें
काल03:18 – 04:50टालें
लाभ04:50 – 06:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2407:22दिन
गुरु07:2208:21दिन
मंगल08:2109:19दिन
सूर्य09:1910:17दिन
शुक्र10:1711:16दिन
बुध11:1612:14दिन
चंद्र12:1413:12दिन
शनि13:1214:11दिन
गुरु14:1115:09दिन
मंगल15:0916:07दिन
सूर्य16:0717:05दिन
शुक्र17:0518:04दिन
बुध18:0419:05रात
चंद्र19:0520:07रात
शनि20:0721:09रात
गुरु21:0922:10रात
मंगल22:1023:12रात
सूर्य23:1200:13रात
शुक्र00:1301:15रात
बुध01:1502:16रात
चंद्र02:1603:18रात
शनि03:1804:20रात
गुरु04:2005:21रात
मंगल05:2106:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2717° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।