9 सितंबर 2029 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 9 सितंबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 9 सितंबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (15:27 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (00:04, 10 सित॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 16:37 से 18:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 18:04
रात 06:22 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:27 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 00:04 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 सितंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 15:27 तक
शुक्ल द्वितीया 12:02, 10 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 00:04, 10 सित॰ तक
हस्त 21:26, 10 सित॰ तक
योग
साध्य 09:30 तक
शुभ 05:36, 10 सित॰ तक
शुक्ल 01:41, 11 सित॰ तक
करण
बव 15:27 तक
बालव 01:45, 10 सित॰ तक
कौलव 12:02, 10 सित॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 08:00 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
06:27
चंद्रास्त
19:09
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:44 – 05:34
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
16:37 – 18:04
यमगंड
12:14 – 13:41
गुलिक काल
15:09 – 16:37

9 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:23 – 07:51टालें
चर07:51 – 09:18सामान्य
लाभ09:18 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:14शुभ
काल12:14 – 13:41टालें
शुभ13:41 – 15:09शुभ
रोग15:09 – 16:37टालें
उद्वेग16:37 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:04 – 19:37शुभ
अमृत19:37 – 21:09शुभ
चर21:09 – 22:41सामान्य
रोग22:41 – 00:13टालें
काल00:13 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:17शुभ
उद्वेग03:17 – 04:49टालें
शुभ04:49 – 06:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2307:21दिन
शुक्र07:2108:20दिन
बुध08:2009:18दिन
चंद्र09:1810:17दिन
शनि10:1711:15दिन
गुरु11:1512:14दिन
मंगल12:1413:12दिन
सूर्य13:1214:11दिन
शुक्र14:1115:09दिन
बुध15:0916:07दिन
चंद्र16:0717:06दिन
शनि17:0618:04दिन
गुरु18:0419:06रात
मंगल19:0620:07रात
सूर्य20:0721:09रात
शुक्र21:0922:10रात
बुध22:1023:12रात
चंद्र23:1200:13रात
शनि00:1301:14रात
गुरु01:1402:16रात
मंगल02:1603:17रात
सूर्य03:1704:19रात
शुक्र04:1905:20रात
बुध05:2006:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2718° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।