5 अक्टूबर 2029 को पर्थ का पंचांग

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (13:16 तक), नक्षत्र मघा (15:30 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:21 पर है। राहुकाल 10:31 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:21
रात 05:48 तक
तिथि
द्वादशी, 13:16 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 15:30 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 13:16 तक
कृष्ण त्रयोदशी 10:21, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मघा 15:30 तक
पूर्वा फाल्गुनी 13:17, 6 अक्टू॰ तक
योग
शुभ 23:37 तक
शुक्ल 19:52, 6 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 13:16 तक
गर 23:52 तक
वणिज 10:21, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:21
चंद्रोदय
03:44
चंद्रास्त
15:38
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
10:31 – 12:05
यमगंड
15:13 – 16:47
गुलिक काल
07:23 – 08:57

5 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:49 – 07:23सामान्य
लाभ07:23 – 08:57शुभ
अमृत08:57 – 10:31शुभ
काल10:31 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:39शुभ
रोग13:39 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 16:47टालें
चर16:47 – 18:21सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:21 – 19:47टालें
काल19:47 – 21:12टालें
लाभ21:12 – 22:38शुभ
उद्वेग22:38 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:30शुभ
अमृत01:30 – 02:56शुभ
चर02:56 – 04:22सामान्य
रोग04:22 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4906:51दिन
बुध06:5107:54दिन
चंद्र07:5408:57दिन
शनि08:5709:59दिन
गुरु09:5911:02दिन
मंगल11:0212:05दिन
सूर्य12:0513:07दिन
शुक्र13:0714:10दिन
बुध14:1015:13दिन
चंद्र15:1316:15दिन
शनि16:1517:18दिन
गुरु17:1818:21दिन
मंगल18:2119:18रात
सूर्य19:1820:15रात
शुक्र20:1521:12रात
बुध21:1222:10रात
चंद्र22:1023:07रात
शनि23:0700:04रात
गुरु00:0401:01रात
मंगल01:0101:59रात
सूर्य01:5902:56रात
शुक्र02:5603:53रात
बुध03:5304:50रात
चंद्र04:5005:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2728° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।