7 अक्टूबर 2029 को पर्थ का पंचांग

रविवार, 7 अक्टूबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

रविवार, 7 अक्टूबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (06:56 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (10:36 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 16:48 से 18:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 18:22
रात 05:45 तक
तिथि
अमावस्या, 03:14 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 10:36 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 06:56 तक
अमावस्या 03:14, 8 अक्टू॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 23:25, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 07:39, 8 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 15:47 तक
इंद्र 11:32, 8 अक्टू॰ तक
करण
शकुनि 06:56 तक
चतुष्पद 17:07 तक
नाग 03:14, 8 अक्टू॰ तक
किंस्तुघ्न 13:20, 8 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
04:56
चंद्रास्त
17:55
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
16:48 – 18:22
यमगंड
12:04 – 13:39
गुलिक काल
15:13 – 16:48

7 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:46 – 07:21टालें
चर07:21 – 08:55सामान्य
लाभ08:55 – 10:30शुभ
अमृत10:30 – 12:04शुभ
काल12:04 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 15:13शुभ
रोग15:13 – 16:48टालें
उद्वेग16:48 – 18:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:22 – 19:47शुभ
अमृत19:47 – 21:13शुभ
चर21:13 – 22:38सामान्य
रोग22:38 – 00:04टालें
काल00:04 – 01:29टालें
लाभ01:29 – 02:54शुभ
उद्वेग02:54 – 04:20टालें
शुभ04:20 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4606:49दिन
शुक्र06:4907:52दिन
बुध07:5208:55दिन
चंद्र08:5509:58दिन
शनि09:5811:01दिन
गुरु11:0112:04दिन
मंगल12:0413:07दिन
सूर्य13:0714:10दिन
शुक्र14:1015:13दिन
बुध15:1316:16दिन
चंद्र16:1617:19दिन
शनि17:1918:22दिन
गुरु18:2219:19रात
मंगल19:1920:16रात
सूर्य20:1621:13रात
शुक्र21:1322:10रात
बुध22:1023:07रात
चंद्र23:0700:04रात
शनि00:0401:00रात
गुरु01:0001:57रात
मंगल01:5702:54रात
सूर्य02:5403:51रात
शुक्र03:5104:48रात
बुध04:4805:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2729° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।