29 अक्टूबर 2029 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 29 अक्टूबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 29 अक्टूबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (06:43 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (01:24, 30 अक्टू॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 07:01 से 08:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 18:39
रात 05:20 तक
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 01:24 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:43 तक
कृष्ण सप्तमी 07:27, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 01:24, 30 अक्टू॰ तक
पुष्य 02:10, 31 अक्टू॰ तक
योग
सिद्ध 15:31 तक
साध्य 14:46, 30 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 06:43 तक
विष्टि (भद्रा) 19:10 तक
बव 07:27, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 19:06 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:16
दिनमान
13h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
07:01 – 08:41
यमगंड
10:20 – 12:00
गुलिक काल
13:40 – 15:19

29 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:21 – 07:01शुभ
काल07:01 – 08:41टालें
शुभ08:41 – 10:20शुभ
रोग10:20 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:40टालें
चर13:40 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 16:59शुभ
अमृत16:59 – 18:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:39 – 19:59सामान्य
रोग19:59 – 21:19टालें
काल21:19 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:40शुभ
अमृत02:40 – 04:00शुभ
चर04:00 – 05:20सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2106:28दिन
शनि06:2807:34दिन
गुरु07:3408:41दिन
मंगल08:4109:47दिन
सूर्य09:4710:54दिन
शुक्र10:5412:00दिन
बुध12:0013:06दिन
चंद्र13:0614:13दिन
शनि14:1315:19दिन
गुरु15:1916:26दिन
मंगल16:2617:32दिन
सूर्य17:3218:39दिन
शुक्र18:3919:32रात
बुध19:3220:26रात
चंद्र20:2621:19रात
शनि21:1922:13रात
गुरु22:1323:06रात
मंगल23:0600:00रात
सूर्य00:0000:53रात
शुक्र00:5301:47रात
बुध01:4702:40रात
चंद्र02:4003:33रात
शनि03:3304:27रात
गुरु04:2705:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2737° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।