1 जून 2025 को पुणे का पंचांग

रविवार, 1 जून 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 1 जून 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (20:00 तक), नक्षत्र आश्लेषा (21:36 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 19:07 पर है। राहुकाल 17:28 से 19:07 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 19:07
रात 05:57 तक
तिथि
षष्ठी, 20:00 तक
सप्तमी
नक्षत्र
आश्लेषा, 21:36 तक
मघा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जून 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 20:00 तक
शुक्ल सप्तमी 20:35, 2 जून तक
नक्षत्र
मघा 22:55, 2 जून तक
योग
ध्रुव 09:11 तक
व्याघातअशुभ 08:20, 2 जून तक
करण
कौलव 08:01 तक
तैतिल 20:00 तक
गर 08:11, 2 जून तक
चंद्र राशि
कर्क 21:36 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
19:07
चंद्रोदय
10:57
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:58

अशुभ समय

राहुकाल
17:28 – 19:07
यमगंड
12:32 – 14:11
गुलिक काल
15:50 – 17:28

1 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:57 – 07:36टालें
चर07:36 – 09:14सामान्य
लाभ09:14 – 10:53शुभ
अमृत10:53 – 12:32शुभ
काल12:32 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:50शुभ
रोग15:50 – 17:28टालें
उद्वेग17:28 – 19:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:07 – 20:28शुभ
अमृत20:28 – 21:50शुभ
चर21:50 – 23:11सामान्य
रोग23:11 – 00:32टालें
काल00:32 – 01:53टालें
लाभ01:53 – 03:14शुभ
उद्वेग03:14 – 04:36टालें
शुभ04:36 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5707:03दिन
शुक्र07:0308:09दिन
बुध08:0909:14दिन
चंद्र09:1410:20दिन
शनि10:2011:26दिन
गुरु11:2612:32दिन
मंगल12:3213:38दिन
सूर्य13:3814:44दिन
शुक्र14:4415:50दिन
बुध15:5016:55दिन
चंद्र16:5518:01दिन
शनि18:0119:07दिन
गुरु19:0720:01रात
मंगल20:0120:55रात
सूर्य20:5521:50रात
शुक्र21:5022:44रात
बुध22:4423:38रात
चंद्र23:3800:32रात
शनि00:3201:26रात
गुरु01:2602:20रात
मंगल02:2003:14रात
सूर्य03:1404:09रात
शुक्र04:0905:03रात
बुध05:0305:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2025ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2025मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2121° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।