31 जुलाई 2025 को पुणे का पंचांग

गुरुवार, 31 जुलाई 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 31 जुलाई 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (04:58, 1 अग॰ तक), नक्षत्र चित्रा (00:41, 1 अग॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:11 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:11 – 19:09
रात 06:12 तक
तिथि
सप्तमी, 04:58 तक
अष्टमी
नक्षत्र
चित्रा, 00:41 तक
स्वाति
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जुलाई 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 04:58, 1 अग॰ तक
शुक्ल अष्टमी 07:23, 2 अग॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 00:41, 1 अग॰ तक
स्वाति 03:40, 2 अग॰ तक
योग
साध्य 04:32, 1 अग॰ तक
शुभ 05:30, 2 अग॰ तक
करण
गर 15:48 तक
वणिज 04:58, 1 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 18:11, 1 अग॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 11:15 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:11
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
11:41
चंद्रास्त
23:23
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:55
यमगंड
06:11 – 07:49
गुलिक काल
09:26 – 11:03

31 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:11 – 07:49शुभ
रोग07:49 – 09:26टालें
उद्वेग09:26 – 11:03टालें
चर11:03 – 12:40सामान्य
लाभ12:40 – 14:18शुभ
अमृत14:18 – 15:55शुभ
काल15:55 – 17:32टालें
शुभ17:32 – 19:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:09 – 20:32शुभ
चर20:32 – 21:55सामान्य
रोग21:55 – 23:18टालें
काल23:18 – 00:41टालें
लाभ00:41 – 02:03शुभ
उद्वेग02:03 – 03:26टालें
शुभ03:26 – 04:49शुभ
अमृत04:49 – 06:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1107:16दिन
मंगल07:1608:21दिन
सूर्य08:2109:26दिन
शुक्र09:2610:31दिन
बुध10:3111:36दिन
चंद्र11:3612:40दिन
शनि12:4013:45दिन
गुरु13:4514:50दिन
मंगल14:5015:55दिन
सूर्य15:5517:00दिन
शुक्र17:0018:05दिन
बुध18:0519:09दिन
चंद्र19:0920:05रात
शनि20:0521:00रात
गुरु21:0021:55रात
मंगल21:5522:50रात
सूर्य22:5023:45रात
शुक्र23:4500:41रात
बुध00:4101:36रात
चंद्र01:3602:31रात
शनि02:3103:26रात
गुरु03:2604:21रात
मंगल04:2105:17रात
सूर्य05:1706:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2144° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।