22 मई 2026 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 22 मई 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 22 मई 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (06:25 तक), नक्षत्र आश्लेषा (02:08, 23 मई तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 10:53 से 12:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 19:03
रात 05:58 तक
तिथि
सप्तमी, 05:04 तक
नक्षत्र
आश्लेषा, 02:08 तक
मघा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मई 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 06:25 तक
शुक्ल सप्तमी 05:04, 23 मई तक
शुक्ल अष्टमी 04:27, 24 मई तक
नक्षत्र
आश्लेषा 02:08, 23 मई तक
मघा 02:09, 24 मई तक
योग
वृद्धि 08:19 तक
ध्रुव 06:13, 23 मई तक
करण
तैतिल 06:25 तक
गर 17:39 तक
वणिज 05:04, 23 मई तक
विष्टि (भद्रा) 16:40, 23 मई तक
चंद्र राशि
कर्क 02:08, 23 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
11:26
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
10:53 – 12:31
यमगंड
15:47 – 17:25
गुलिक काल
07:37 – 09:15

22 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:58 – 07:37सामान्य
लाभ07:37 – 09:15शुभ
अमृत09:15 – 10:53शुभ
काल10:53 – 12:31टालें
शुभ12:31 – 14:09शुभ
रोग14:09 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:25टालें
चर17:25 – 19:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:03 – 20:25टालें
काल20:25 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:09शुभ
उद्वेग23:09 – 00:31टालें
शुभ00:31 – 01:53शुभ
अमृत01:53 – 03:14शुभ
चर03:14 – 04:36सामान्य
रोग04:36 – 05:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5807:04दिन
बुध07:0408:09दिन
चंद्र08:0909:15दिन
शनि09:1510:20दिन
गुरु10:2011:25दिन
मंगल11:2512:31दिन
सूर्य12:3113:36दिन
शुक्र13:3614:42दिन
बुध14:4215:47दिन
चंद्र15:4716:52दिन
शनि16:5217:58दिन
गुरु17:5819:03दिन
मंगल19:0319:58रात
सूर्य19:5820:52रात
शुक्र20:5221:47रात
बुध21:4722:42रात
चंद्र22:4223:36रात
शनि23:3600:31रात
गुरु00:3101:25रात
मंगल01:2502:20रात
सूर्य02:2003:14रात
शुक्र03:1404:09रात
बुध04:0905:04रात
चंद्र05:0405:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 मई 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 मई 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मई 2026अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जून 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जून 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 जून 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2257° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।