16 अगस्त 2026 को पुणे का पंचांग

रविवार, 16 अगस्त 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 16 अगस्त 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (16:53 तक), नक्षत्र हस्त (03:50, 17 अग॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 17:25 से 19:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 19:01
रात 06:16 तक
तिथि
चतुर्थी, 16:53 तक
पंचमी
नक्षत्र
हस्त, 03:50 तक
चित्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अगस्त 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 16:53 तक
शुक्ल पंचमी 17:00, 17 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 03:50, 17 अग॰ तक
चित्रा 04:58, 18 अग॰ तक
योग
साध्य 04:08, 17 अग॰ तक
शुभ 03:29, 18 अग॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:53 तक
बव 04:51, 17 अग॰ तक
बालव 17:00, 17 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
09:27
चंद्रास्त
21:27
दिनमान
12h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
17:25 – 19:01
यमगंड
12:38 – 14:14
गुलिक काल
15:49 – 17:25

16 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:16 – 07:52टालें
चर07:52 – 09:27सामान्य
लाभ09:27 – 11:03शुभ
अमृत11:03 – 12:38शुभ
काल12:38 – 14:14टालें
शुभ14:14 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:25टालें
उद्वेग17:25 – 19:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:01 – 20:25शुभ
अमृत20:25 – 21:50शुभ
चर21:50 – 23:14सामान्य
रोग23:14 – 00:38टालें
काल00:38 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:27शुभ
उद्वेग03:27 – 04:52टालें
शुभ04:52 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1607:20दिन
शुक्र07:2008:23दिन
बुध08:2309:27दिन
चंद्र09:2710:31दिन
शनि10:3111:35दिन
गुरु11:3512:38दिन
मंगल12:3813:42दिन
सूर्य13:4214:46दिन
शुक्र14:4615:49दिन
बुध15:4916:53दिन
चंद्र16:5317:57दिन
शनि17:5719:01दिन
गुरु19:0119:57रात
मंगल19:5720:53रात
सूर्य20:5321:50रात
शुक्र21:5022:46रात
बुध22:4623:42रात
चंद्र23:4200:38रात
शनि00:3801:35रात
गुरु01:3502:31रात
मंगल02:3103:27रात
सूर्य03:2704:24रात
शुक्र04:2405:20रात
बुध05:2006:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2289° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।