14 जून 2027 को पुणे का पंचांग

सोमवार, 14 जून 2027, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 14 जून 2027 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (02:08, 15 जून तक), नक्षत्र चित्रा (17:28 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 19:11 पर है। राहुकाल 07:37 से 09:16 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 19:11
रात 05:57 तक
तिथि
एकादशी, 02:08 तक
द्वादशी
नक्षत्र
चित्रा, 17:28 तक
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जून 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 02:08, 15 जून तक
शुक्ल द्वादशी 02:31, 16 जून तक
नक्षत्र
चित्रा 17:28 तक
स्वाति 18:23, 15 जून तक
योग
वरीयान 07:45 तक
परिघअशुभ 06:46, 15 जून तक
करण
वणिज 14:07 तक
विष्टि (भद्रा) 02:08, 15 जून तक
बव 14:16, 15 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
19:11
चंद्रोदय
15:10
चंद्रास्त
02:04
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 13:01

अशुभ समय

राहुकाल
07:37 – 09:16
यमगंड
10:55 – 12:34
गुलिक काल
14:14 – 15:53

14 जून 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:57 – 07:37शुभ
काल07:37 – 09:16टालें
शुभ09:16 – 10:55शुभ
रोग10:55 – 12:34टालें
उद्वेग12:34 – 14:14टालें
चर14:14 – 15:53सामान्य
लाभ15:53 – 17:32शुभ
अमृत17:32 – 19:11शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:11 – 20:32सामान्य
रोग20:32 – 21:53टालें
काल21:53 – 23:14टालें
लाभ23:14 – 00:34शुभ
उद्वेग00:34 – 01:55टालें
शुभ01:55 – 03:16शुभ
अमृत03:16 – 04:37शुभ
चर04:37 – 05:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5707:03दिन
शनि07:0308:10दिन
गुरु08:1009:16दिन
मंगल09:1610:22दिन
सूर्य10:2211:28दिन
शुक्र11:2812:34दिन
बुध12:3413:40दिन
चंद्र13:4014:47दिन
शनि14:4715:53दिन
गुरु15:5316:59दिन
मंगल16:5918:05दिन
सूर्य18:0519:11दिन
शुक्र19:1120:05रात
बुध20:0520:59रात
चंद्र20:5921:53रात
शनि21:5322:47रात
गुरु22:4723:41रात
मंगल23:4100:34रात
सूर्य00:3401:28रात
शुक्र01:2802:22रात
बुध02:2203:16रात
चंद्र03:1604:10रात
शनि04:1005:04रात
गुरु05:0405:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जुल॰ 2027आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
7 जुल॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2405° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।