30 जून 2028 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 30 जून 2028, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 जून 2028 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (02:47, 1 जुल॰ तक), नक्षत्र हस्त (09:34 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 10:59 से 12:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 19:15
रात 06:01 तक
तिथि
नवमी, 02:47 तक
दशमी
नक्षत्र
हस्त, 09:34 तक
चित्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जून 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:47, 1 जुल॰ तक
शुक्ल दशमी 01:14, 2 जुल॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:34 तक
चित्रा 08:34, 1 जुल॰ तक
योग
परिघअशुभ 18:10 तक
शिव 15:47, 1 जुल॰ तक
करण
बालव 15:40 तक
कौलव 02:47, 1 जुल॰ तक
तैतिल 13:58, 1 जुल॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 21:01 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
13:21
चंद्रास्त
00:24
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
10:59 – 12:38
यमगंड
15:56 – 17:35
गुलिक काल
07:40 – 09:19

30 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:01 – 07:40सामान्य
लाभ07:40 – 09:19शुभ
अमृत09:19 – 10:59शुभ
काल10:59 – 12:38टालें
शुभ12:38 – 14:17शुभ
रोग14:17 – 15:56टालें
उद्वेग15:56 – 17:35टालें
चर17:35 – 19:15सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:15 – 20:35टालें
काल20:35 – 21:56टालें
लाभ21:56 – 23:17शुभ
उद्वेग23:17 – 00:38टालें
शुभ00:38 – 01:59शुभ
अमृत01:59 – 03:20शुभ
चर03:20 – 04:40सामान्य
रोग04:40 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0107:07दिन
बुध07:0708:13दिन
चंद्र08:1309:19दिन
शनि09:1910:26दिन
गुरु10:2611:32दिन
मंगल11:3212:38दिन
सूर्य12:3813:44दिन
शुक्र13:4414:50दिन
बुध14:5015:56दिन
चंद्र15:5617:02दिन
शनि17:0218:08दिन
गुरु18:0819:15दिन
मंगल19:1520:08रात
सूर्य20:0821:02रात
शुक्र21:0221:56रात
बुध21:5622:50रात
चंद्र22:5023:44रात
शनि23:4400:38रात
गुरु00:3801:32रात
मंगल01:3202:26रात
सूर्य02:2603:20रात
शुक्र03:2004:14रात
बुध04:1405:07रात
चंद्र05:0706:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2551° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।