13 दिसंबर 2028 को पुणे का पंचांग

बुधवार, 13 दिसंबर 2028, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 13 दिसंबर 2028 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (12:56 तक), नक्षत्र स्वाति (10:19 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 12:28 से 13:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 17:59
रात 06:58 तक
तिथि
द्वादशी, 12:56 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
स्वाति, 10:19 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 12:56 तक
कृष्ण त्रयोदशी 10:50, 14 दिस॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 10:19 तक
विशाखा 08:53, 14 दिस॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 14:21 तक
सुकर्मा 11:26, 14 दिस॰ तक
करण
तैतिल 12:56 तक
गर 23:51 तक
वणिज 10:50, 14 दिस॰ तक
चंद्र राशि
तुला 03:13, 14 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
03:59
चंद्रास्त
15:27
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:28 – 13:51
यमगंड
08:20 – 09:43
गुलिक काल
11:06 – 12:28

13 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:57 – 08:20शुभ
अमृत08:20 – 09:43शुभ
काल09:43 – 11:06टालें
शुभ11:06 – 12:28शुभ
रोग12:28 – 13:51टालें
उद्वेग13:51 – 15:14टालें
चर15:14 – 16:37सामान्य
लाभ16:37 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:59 – 19:37टालें
शुभ19:37 – 21:14शुभ
अमृत21:14 – 22:51शुभ
चर22:51 – 00:29सामान्य
रोग00:29 – 02:06टालें
काल02:06 – 03:43टालें
लाभ03:43 – 05:21शुभ
उद्वेग05:21 – 06:58टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5707:53दिन
चंद्र07:5308:48दिन
शनि08:4809:43दिन
गुरु09:4310:38दिन
मंगल10:3811:33दिन
सूर्य11:3312:28दिन
शुक्र12:2813:24दिन
बुध13:2414:19दिन
चंद्र14:1915:14दिन
शनि15:1416:09दिन
गुरु16:0917:04दिन
मंगल17:0417:59दिन
सूर्य17:5919:04रात
शुक्र19:0420:09रात
बुध20:0921:14रात
चंद्र21:1422:19रात
शनि22:1923:24रात
गुरु23:2400:29रात
मंगल00:2901:34रात
सूर्य01:3402:38रात
शुक्र02:3803:43रात
बुध03:4304:48रात
चंद्र04:4805:53रात
शनि05:5306:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2615° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।