2 जून 2029 को पुणे का पंचांग

शनिवार, 2 जून 2029, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 2 जून 2029 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (16:43 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (05:43, 3 जून तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 19:07 पर है। राहुकाल 09:14 से 10:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 19:07
रात 05:57 तक
तिथि
षष्ठी, 16:43 तक
सप्तमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 05:43 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जून 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 16:43 तक
कृष्ण सप्तमी 17:58, 3 जून तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 05:43, 3 जून तक
शतभिषा 07:53, 4 जून तक
योग
इंद्र 14:35 तक
वैधृतिअशुभ 14:32, 3 जून तक
करण
वणिज 16:43 तक
विष्टि (भद्रा) 05:16, 3 जून तक
बव 17:58, 3 जून तक
चंद्र राशि
मकर 16:51 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
19:07
चंद्रोदय
23:54
चंद्रास्त
11:05
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:58

अशुभ समय

राहुकाल
09:14 – 10:53
यमगंड
14:11 – 15:50
गुलिक काल
05:57 – 07:36

2 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:57 – 07:36टालें
शुभ07:36 – 09:14शुभ
रोग09:14 – 10:53टालें
उद्वेग10:53 – 12:32टालें
चर12:32 – 14:11सामान्य
लाभ14:11 – 15:50शुभ
अमृत15:50 – 17:29शुभ
काल17:29 – 19:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:07 – 20:29शुभ
उद्वेग20:29 – 21:50टालें
शुभ21:50 – 23:11शुभ
अमृत23:11 – 00:32शुभ
चर00:32 – 01:53सामान्य
रोग01:53 – 03:14टालें
काल03:14 – 04:36टालें
लाभ04:36 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5707:03दिन
गुरु07:0308:09दिन
मंगल08:0909:14दिन
सूर्य09:1410:20दिन
शुक्र10:2011:26दिन
बुध11:2612:32दिन
चंद्र12:3213:38दिन
शनि13:3814:44दिन
गुरु14:4415:50दिन
मंगल15:5016:56दिन
सूर्य16:5618:02दिन
शुक्र18:0219:07दिन
बुध19:0720:02रात
चंद्र20:0220:56रात
शनि20:5621:50रात
गुरु21:5022:44रात
मंगल22:4423:38रात
सूर्य23:3800:32रात
शुक्र00:3201:26रात
बुध01:2602:20रात
चंद्र02:2003:14रात
शनि03:1404:09रात
गुरु04:0905:03रात
मंगल05:0305:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जून 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2680° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।