28 जनवरी 2025 को पुरी का पंचांग

मंगलवार, 28 जनवरी 2025, पुरी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 28 जनवरी 2025 को पुरी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (19:36 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (08:58 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 14:48 से 16:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:36
रात 06:22 तक
तिथि
चतुर्दशी, 19:36 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जनवरी 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:36 तक
अमावस्या 18:06, 29 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:20, 29 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 23:51 तक
सिद्धि 21:21, 29 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:10 तक
शकुनि 19:36 तक
चतुष्पद 06:54, 29 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 14:52 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
05:23
चंद्रास्त
16:26
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
14:48 – 16:12
यमगंड
09:11 – 10:35
गुलिक काल
11:59 – 13:23

28 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:22 – 07:47टालें
उद्वेग07:47 – 09:11टालें
चर09:11 – 10:35सामान्य
लाभ10:35 – 11:59शुभ
अमृत11:59 – 13:23शुभ
काल13:23 – 14:48टालें
शुभ14:48 – 16:12शुभ
रोग16:12 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:36 – 19:12टालें
लाभ19:12 – 20:48शुभ
उद्वेग20:48 – 22:23टालें
शुभ22:23 – 23:59शुभ
अमृत23:59 – 01:35शुभ
चर01:35 – 03:11सामान्य
रोग03:11 – 04:46टालें
काल04:46 – 06:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2207:19दिन
सूर्य07:1908:15दिन
शुक्र08:1509:11दिन
बुध09:1110:07दिन
चंद्र10:0711:03दिन
शनि11:0311:59दिन
गुरु11:5912:55दिन
मंगल12:5513:51दिन
सूर्य13:5114:48दिन
शुक्र14:4815:44दिन
बुध15:4416:40दिन
चंद्र16:4017:36दिन
शनि17:3618:40रात
गुरु18:4019:44रात
मंगल19:4420:48रात
सूर्य20:4821:51रात
शुक्र21:5122:55रात
बुध22:5523:59रात
चंद्र23:5901:03रात
शनि01:0302:07रात
गुरु02:0703:11रात
मंगल03:1104:15रात
सूर्य04:1505:18रात
शुक्र05:1806:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुरी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2073° (लाहिड़ी)। समय पुरी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।