6 जनवरी 2029 को पुरी का पंचांग

शनिवार, 6 जनवरी 2029, पुरी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 6 जनवरी 2029 को पुरी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (10:13 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (20:31 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 09:07 से 10:30 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:22
रात 06:23 तक
तिथि
षष्ठी, 10:13 तक
सप्तमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 20:31 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जनवरी 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 10:13 तक
कृष्ण सप्तमी 08:00, 7 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 19:02, 7 जन॰ तक
योग
सौभाग्य 06:25 तक
शोभन 03:22, 7 जन॰ तक
अतिगंडअशुभ 00:25, 8 जन॰ तक
करण
वणिज 10:13 तक
विष्टि (भद्रा) 21:06 तक
बव 08:00, 7 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
23:04
चंद्रास्त
10:21
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:30
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
09:07 – 10:30
यमगंड
13:15 – 14:37
गुलिक काल
06:22 – 07:45

6 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:22 – 07:45टालें
शुभ07:45 – 09:07शुभ
रोग09:07 – 10:30टालें
उद्वेग10:30 – 11:52टालें
चर11:52 – 13:15सामान्य
लाभ13:15 – 14:37शुभ
अमृत14:37 – 15:59शुभ
काल15:59 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:22 – 18:59शुभ
उद्वेग18:59 – 20:37टालें
शुभ20:37 – 22:15शुभ
अमृत22:15 – 23:52शुभ
चर23:52 – 01:30सामान्य
रोग01:30 – 03:07टालें
काल03:07 – 04:45टालें
लाभ04:45 – 06:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2207:17दिन
गुरु07:1708:12दिन
मंगल08:1209:07दिन
सूर्य09:0710:02दिन
शुक्र10:0210:57दिन
बुध10:5711:52दिन
चंद्र11:5212:47दिन
शनि12:4713:42दिन
गुरु13:4214:37दिन
मंगल14:3715:32दिन
सूर्य15:3216:27दिन
शुक्र16:2717:22दिन
बुध17:2218:27रात
चंद्र18:2719:32रात
शनि19:3220:37रात
गुरु20:3721:42रात
मंगल21:4222:47रात
सूर्य22:4723:52रात
शुक्र23:5200:57रात
बुध00:5702:02रात
चंद्र02:0203:07रात
शनि03:0704:12रात
गुरु04:1205:18रात
मंगल05:1806:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुरी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2624° (लाहिड़ी)। समय पुरी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।