22 जनवरी 2025 को पुरुलिया का पंचांग

बुधवार, 22 जनवरी 2025, पुरुलिया, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 जनवरी 2025 को पुरुलिया में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (15:18 तक), नक्षत्र स्वाति (02:34, 23 जन॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 11:56 से 13:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:24
रात 06:27 तक
तिथि
अष्टमी, 15:18 तक
नवमी
नक्षत्र
स्वाति, 02:34 तक
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 15:18 तक
कृष्ण नवमी 17:38, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 02:34, 23 जन॰ तक
विशाखा 05:08, 24 जन॰ तक
योग
शूलअशुभ 04:37, 23 जन॰ तक
गंडअशुभ 05:06, 24 जन॰ तक
करण
कौलव 15:18 तक
तैतिल 04:31, 23 जन॰ तक
गर 17:38, 23 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:20
दिनमान
10h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:18 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:56 – 13:18
यमगंड
07:49 – 09:11
गुलिक काल
10:34 – 11:56

22 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:27 – 07:49शुभ
अमृत07:49 – 09:11शुभ
काल09:11 – 10:34टालें
शुभ10:34 – 11:56शुभ
रोग11:56 – 13:18टालें
उद्वेग13:18 – 14:40टालें
चर14:40 – 16:02सामान्य
लाभ16:02 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:24 – 19:02टालें
शुभ19:02 – 20:40शुभ
अमृत20:40 – 22:18शुभ
चर22:18 – 23:56सामान्य
रोग23:56 – 01:33टालें
काल01:33 – 03:11टालें
लाभ03:11 – 04:49शुभ
उद्वेग04:49 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2707:22दिन
चंद्र07:2208:17दिन
शनि08:1709:11दिन
गुरु09:1110:06दिन
मंगल10:0611:01दिन
सूर्य11:0111:56दिन
शुक्र11:5612:50दिन
बुध12:5013:45दिन
चंद्र13:4514:40दिन
शनि14:4015:35दिन
गुरु15:3516:30दिन
मंगल16:3017:24दिन
सूर्य17:2418:30रात
शुक्र18:3019:35रात
बुध19:3520:40रात
चंद्र20:4021:45रात
शनि21:4522:50रात
गुरु22:5023:56रात
मंगल23:5601:01रात
सूर्य01:0102:06रात
शुक्र02:0603:11रात
बुध03:1104:16रात
चंद्र04:1605:22रात
शनि05:2206:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुरुलिया में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2071° (लाहिड़ी)। समय पुरुलिया (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।