3 मार्च 2025 को पुष्कर का पंचांग

सोमवार, 3 मार्च 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 मार्च 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (18:02 तक), नक्षत्र अश्विनी (04:29, 4 मार्च तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 08:21 से 09:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 18:34
रात 06:52 तक
तिथि
चतुर्थी, 18:02 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 04:29 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:02 तक
शुक्ल पंचमी 15:17, 4 मार्च तक
नक्षत्र
अश्विनी 04:29, 4 मार्च तक
भरणी 02:37, 5 मार्च तक
योग
शुक्ल 08:57 तक
ब्रह्म 05:24, 4 मार्च तक
इंद्र 02:06, 5 मार्च तक
करण
वणिज 07:31 तक
विष्टि (भद्रा) 18:02 तक
बव 04:37, 4 मार्च तक
बालव 15:17, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
08:54
चंद्रास्त
22:18
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
12:20 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
08:21 – 09:48
यमगंड
11:16 – 12:43
गुलिक काल
14:11 – 15:39

3 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:53 – 08:21शुभ
काल08:21 – 09:48टालें
शुभ09:48 – 11:16शुभ
रोग11:16 – 12:43टालें
उद्वेग12:43 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:39सामान्य
लाभ15:39 – 17:06शुभ
अमृत17:06 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:34 – 20:06सामान्य
रोग20:06 – 21:38टालें
काल21:38 – 23:11टालें
लाभ23:11 – 00:43शुभ
उद्वेग00:43 – 02:15टालें
शुभ02:15 – 03:47शुभ
अमृत03:47 – 05:20शुभ
चर05:20 – 06:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5307:51दिन
शनि07:5108:50दिन
गुरु08:5009:48दिन
मंगल09:4810:47दिन
सूर्य10:4711:45दिन
शुक्र11:4512:43दिन
बुध12:4313:42दिन
चंद्र13:4214:40दिन
शनि14:4015:39दिन
गुरु15:3916:37दिन
मंगल16:3717:35दिन
सूर्य17:3518:34दिन
शुक्र18:3419:35रात
बुध19:3520:37रात
चंद्र20:3721:38रात
शनि21:3822:40रात
गुरु22:4023:41रात
मंगल23:4100:43रात
सूर्य00:4301:44रात
शुक्र01:4402:46रात
बुध02:4603:47रात
चंद्र03:4704:49रात
शनि04:4905:51रात
गुरु05:5106:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2086° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।