3 सितंबर 2025 को पुष्कर का पंचांग

बुधवार, 3 सितंबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 3 सितंबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (04:22, 4 सित॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (23:08 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 12:30 से 14:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 18:49
रात 06:12 तक
तिथि
एकादशी, 04:22 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 23:08 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 सितंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 04:22, 4 सित॰ तक
शुक्ल द्वादशी 04:08, 5 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 23:44, 4 सित॰ तक
योग
आयुष्मान 16:17 तक
सौभाग्य 15:21, 4 सित॰ तक
करण
वणिज 16:13 तक
विष्टि (भद्रा) 04:22, 4 सित॰ तक
बव 16:20, 4 सित॰ तक
चंद्र राशि
धनु 05:21, 4 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
15:56
चंद्रास्त
01:23
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:30 – 14:05
यमगंड
07:47 – 09:21
गुलिक काल
10:56 – 12:30

3 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:12 – 07:47शुभ
अमृत07:47 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:56टालें
शुभ10:56 – 12:30शुभ
रोग12:30 – 14:05टालें
उद्वेग14:05 – 15:40टालें
चर15:40 – 17:14सामान्य
लाभ17:14 – 18:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:49 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:40शुभ
अमृत21:40 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:31सामान्य
रोग00:31 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:21टालें
लाभ03:21 – 04:47शुभ
उद्वेग04:47 – 06:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1207:15दिन
चंद्र07:1508:18दिन
शनि08:1809:21दिन
गुरु09:2110:24दिन
मंगल10:2411:27दिन
सूर्य11:2712:30दिन
शुक्र12:3013:34दिन
बुध13:3414:37दिन
चंद्र14:3715:40दिन
शनि15:4016:43दिन
गुरु16:4317:46दिन
मंगल17:4618:49दिन
सूर्य18:4919:46रात
शुक्र19:4620:43रात
बुध20:4321:40रात
चंद्र21:4022:37रात
शनि22:3723:34रात
गुरु23:3400:31रात
मंगल00:3101:28रात
सूर्य01:2802:25रात
शुक्र02:2503:21रात
बुध03:2104:18रात
चंद्र04:1805:15रात
शनि05:1506:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2157° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।