25 जनवरी 2026 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 25 जनवरी 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 जनवरी 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (23:10 तक), नक्षत्र रेवती (13:35 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 07:19 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 16:47 से 18:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:19 – 18:08
रात 07:19 तक
तिथि
सप्तमी, 23:10 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रेवती, 13:35 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जनवरी 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 23:10 तक
शुक्ल अष्टमी 21:18, 26 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 13:35 तक
अश्विनी 12:33, 26 जन॰ तक
योग
सिद्ध 11:45 तक
साध्य 09:11, 26 जन॰ तक
करण
गर 11:58 तक
वणिज 23:10 तक
विष्टि (भद्रा) 10:17, 26 जन॰ तक
चंद्र राशि
मीन 13:35 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:19
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
11:08
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:33 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
16:47 – 18:08
यमगंड
12:44 – 14:05
गुलिक काल
15:26 – 16:47

25 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:19 – 08:40टालें
चर08:40 – 10:01सामान्य
लाभ10:01 – 11:23शुभ
अमृत11:23 – 12:44शुभ
काल12:44 – 14:05टालें
शुभ14:05 – 15:26शुभ
रोग15:26 – 16:47टालें
उद्वेग16:47 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:08 – 19:47शुभ
अमृत19:47 – 21:26शुभ
चर21:26 – 23:05सामान्य
रोग23:05 – 00:44टालें
काल00:44 – 02:22टालें
लाभ02:22 – 04:01शुभ
उद्वेग04:01 – 05:40टालें
शुभ05:40 – 07:19शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1908:13दिन
शुक्र08:1309:07दिन
बुध09:0710:01दिन
चंद्र10:0110:55दिन
शनि10:5511:50दिन
गुरु11:5012:44दिन
मंगल12:4413:38दिन
सूर्य13:3814:32दिन
शुक्र14:3215:26दिन
बुध15:2616:20दिन
चंद्र16:2017:14दिन
शनि17:1418:08दिन
गुरु18:0819:14रात
मंगल19:1420:20रात
सूर्य20:2021:26रात
शुक्र21:2622:32रात
बुध22:3223:38रात
चंद्र23:3800:44रात
शनि00:4401:49रात
गुरु01:4902:55रात
मंगल02:5504:01रात
सूर्य04:0105:07रात
शुक्र05:0706:13रात
बुध06:1307:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2212° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।