18 दिसंबर 2026 को पुष्कर का पंचांग

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (23:14 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (16:10 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 07:13 पर और सूर्यास्त 17:42 पर है। राहुकाल 11:09 से 12:28 तक है।

दिन और रात
दिन 07:13 – 17:42
रात 07:14 तक
तिथि
नवमी, 23:14 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 16:10 तक
रेवती
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 23:14 तक
शुक्ल दशमी 22:09, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 15:58, 19 दिस॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 12:19 तक
वरीयान 10:35, 19 दिस॰ तक
करण
बालव 11:27 तक
कौलव 23:14 तक
तैतिल 10:48, 19 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:13
सूर्यास्त
17:42
चंद्रोदय
12:58
चंद्रास्त
00:58
दिनमान
10h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
11:09 – 12:28
यमगंड
15:05 – 16:24
गुलिक काल
08:32 – 09:51

18 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:13 – 08:32सामान्य
लाभ08:32 – 09:51शुभ
अमृत09:51 – 11:09शुभ
काल11:09 – 12:28टालें
शुभ12:28 – 13:46शुभ
रोग13:46 – 15:05टालें
उद्वेग15:05 – 16:24टालें
चर16:24 – 17:42सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:42 – 19:24टालें
काल19:24 – 21:05टालें
लाभ21:05 – 22:47शुभ
उद्वेग22:47 – 00:28टालें
शुभ00:28 – 02:09शुभ
अमृत02:09 – 03:51शुभ
चर03:51 – 05:32सामान्य
रोग05:32 – 07:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1308:06दिन
बुध08:0608:58दिन
चंद्र08:5809:51दिन
शनि09:5110:43दिन
गुरु10:4311:35दिन
मंगल11:3512:28दिन
सूर्य12:2813:20दिन
शुक्र13:2014:13दिन
बुध14:1315:05दिन
चंद्र15:0515:57दिन
शनि15:5716:50दिन
गुरु16:5017:42दिन
मंगल17:4218:50रात
सूर्य18:5019:57रात
शुक्र19:5721:05रात
बुध21:0522:13रात
चंद्र22:1323:20रात
शनि23:2000:28रात
गुरु00:2801:36रात
मंगल01:3602:43रात
सूर्य02:4303:51रात
शुक्र03:5104:59रात
बुध04:5906:06रात
चंद्र06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2337° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।