28 दिसंबर 2026 को पुष्कर का पंचांग

सोमवार, 28 दिसंबर 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 28 दिसंबर 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (14:58 तक), नक्षत्र मघा (16:33 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:18 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है। राहुकाल 08:37 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 07:18 – 17:47
रात 07:18 तक
तिथि
पंचमी, 14:58 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मघा, 16:33 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 14:58 तक
कृष्ण षष्ठी 13:25, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:33 तक
पूर्वा फाल्गुनी 15:43, 29 दिस॰ तक
योग
प्रीति 17:55 तक
आयुष्मान 15:30, 29 दिस॰ तक
करण
तैतिल 14:58 तक
गर 02:06, 29 दिस॰ तक
वणिज 13:25, 29 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:18
सूर्यास्त
17:47
चंद्रोदय
22:39
चंद्रास्त
10:44
दिनमान
10h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:30 – 06:24
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:37 – 09:55
यमगंड
11:14 – 12:33
गुलिक काल
13:51 – 15:10

28 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:18 – 08:37शुभ
काल08:37 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:14शुभ
रोग11:14 – 12:33टालें
उद्वेग12:33 – 13:51टालें
चर13:51 – 15:10सामान्य
लाभ15:10 – 16:29शुभ
अमृत16:29 – 17:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:47 – 19:29सामान्य
रोग19:29 – 21:10टालें
काल21:10 – 22:52टालें
लाभ22:52 – 00:33शुभ
उद्वेग00:33 – 02:14टालें
शुभ02:14 – 03:56शुभ
अमृत03:56 – 05:37शुभ
चर05:37 – 07:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:1808:10दिन
शनि08:1009:03दिन
गुरु09:0309:55दिन
मंगल09:5510:48दिन
सूर्य10:4811:40दिन
शुक्र11:4012:33दिन
बुध12:3313:25दिन
चंद्र13:2514:18दिन
शनि14:1815:10दिन
गुरु15:1016:03दिन
मंगल16:0316:55दिन
सूर्य16:5517:47दिन
शुक्र17:4718:55रात
बुध18:5520:03रात
चंद्र20:0321:10रात
शनि21:1022:18रात
गुरु22:1823:25रात
मंगल23:2500:33रात
सूर्य00:3301:40रात
शुक्र01:4002:48रात
बुध02:4803:56रात
चंद्र03:5605:03रात
शनि05:0306:11रात
गुरु06:1107:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2341° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।