4 फ़रवरी 2027 को पुष्कर का पंचांग

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:31 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (15:32 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:31 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 18:16
रात 07:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:31 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 15:32 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:31 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:05, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 18:32, 5 फ़र॰ तक
योग
वज्रअशुभ 19:41 तक
सिद्धि 20:33, 5 फ़र॰ तक
करण
वणिज 16:31 तक
विष्टि (भद्रा) 05:50, 5 फ़र॰ तक
शकुनि 19:05, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
धनु 22:18 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
05:42
चंद्रास्त
16:15
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:31 – 06:23
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:31
यमगंड
07:15 – 08:37
गुलिक काल
10:00 – 11:23

4 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:15 – 08:37शुभ
रोग08:37 – 10:00टालें
उद्वेग10:00 – 11:23टालें
चर11:23 – 12:45सामान्य
लाभ12:45 – 14:08शुभ
अमृत14:08 – 15:31शुभ
काल15:31 – 16:53टालें
शुभ16:53 – 18:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:16 – 19:53शुभ
चर19:53 – 21:30सामान्य
रोग21:30 – 23:08टालें
काल23:08 – 00:45टालें
लाभ00:45 – 02:22शुभ
उद्वेग02:22 – 04:00टालें
शुभ04:00 – 05:37शुभ
अमृत05:37 – 07:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1508:10दिन
मंगल08:1009:05दिन
सूर्य09:0510:00दिन
शुक्र10:0010:55दिन
बुध10:5511:50दिन
चंद्र11:5012:45दिन
शनि12:4513:40दिन
गुरु13:4014:35दिन
मंगल14:3515:31दिन
सूर्य15:3116:26दिन
शुक्र16:2617:21दिन
बुध17:2118:16दिन
चंद्र18:1619:21रात
शनि19:2120:26रात
गुरु20:2621:30रात
मंगल21:3022:35रात
सूर्य22:3523:40रात
शुक्र23:4000:45रात
बुध00:4501:50रात
चंद्र01:5002:55रात
शनि02:5504:00रात
गुरु04:0005:04रात
मंगल05:0406:09रात
सूर्य06:0907:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2355° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।