6 मई 2027 को पुष्कर का पंचांग

गुरुवार, 6 मई 2027, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 6 मई 2027 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:28 तक), नक्षत्र भरणी (01:18, 7 मई तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 19:06
रात 05:50 तक
तिथि
अमावस्या, 16:28 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 01:18 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 मई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 16:28 तक
शुक्ल प्रतिपदा 14:14, 7 मई तक
नक्षत्र
भरणी 01:18, 7 मई तक
कृत्तिका 23:42, 7 मई तक
योग
आयुष्मान 11:47 तक
सौभाग्य 08:57, 7 मई तक
करण
नाग 16:28 तक
किंस्तुघ्न 03:24, 7 मई तक
बव 14:14, 7 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
05:18
चंद्रास्त
19:13
दिनमान
13h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:47
यमगंड
05:50 – 07:30
गुलिक काल
09:09 – 10:49

6 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:50 – 07:30शुभ
रोग07:30 – 09:09टालें
उद्वेग09:09 – 10:49टालें
चर10:49 – 12:28सामान्य
लाभ12:28 – 14:08शुभ
अमृत14:08 – 15:47शुभ
काल15:47 – 17:26टालें
शुभ17:26 – 19:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:06 – 20:26शुभ
चर20:26 – 21:47सामान्य
रोग21:47 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:28टालें
लाभ00:28 – 01:48शुभ
उद्वेग01:48 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:29शुभ
अमृत04:29 – 05:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5006:57दिन
मंगल06:5708:03दिन
सूर्य08:0309:09दिन
शुक्र09:0910:16दिन
बुध10:1611:22दिन
चंद्र11:2212:28दिन
शनि12:2813:34दिन
गुरु13:3414:41दिन
मंगल14:4115:47दिन
सूर्य15:4716:53दिन
शुक्र16:5318:00दिन
बुध18:0019:06दिन
चंद्र19:0620:00रात
शनि20:0020:53रात
गुरु20:5321:47रात
मंगल21:4722:41रात
सूर्य22:4123:34रात
शुक्र23:3400:28रात
बुध00:2801:21रात
चंद्र01:2102:15रात
शनि02:1503:09रात
गुरु03:0904:02रात
मंगल04:0204:56रात
सूर्य04:5605:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या
10 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
24 मई 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2390° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।