12 सितंबर 2027 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 12 सितंबर 2027, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 12 सितंबर 2027 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (22:13 तक), नक्षत्र श्रवण (06:05, 13 सित॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 17:07 से 18:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 18:40
रात 06:16 तक
तिथि
द्वादशी, 22:13 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
श्रवण, 06:05 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 22:13 तक
शुक्ल त्रयोदशी 00:40, 14 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 06:05, 13 सित॰ तक
धनिष्ठा 08:59, 14 सित॰ तक
योग
शोभन 06:43 तक
अतिगंडअशुभ 07:45, 13 सित॰ तक
करण
बव 08:55 तक
बालव 22:13 तक
कौलव 11:28, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
16:37
चंद्रास्त
02:54
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
17:07 – 18:40
यमगंड
12:28 – 14:01
गुलिक काल
15:34 – 17:07

12 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:15 – 07:48टालें
चर07:48 – 09:21सामान्य
लाभ09:21 – 10:55शुभ
अमृत10:55 – 12:28शुभ
काल12:28 – 14:01टालें
शुभ14:01 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 17:07टालें
उद्वेग17:07 – 18:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:40 – 20:07शुभ
अमृत20:07 – 21:34शुभ
चर21:34 – 23:01सामान्य
रोग23:01 – 00:28टालें
काल00:28 – 01:55टालें
लाभ01:55 – 03:22शुभ
उद्वेग03:22 – 04:49टालें
शुभ04:49 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1507:17दिन
शुक्र07:1708:19दिन
बुध08:1909:21दिन
चंद्र09:2110:24दिन
शनि10:2411:26दिन
गुरु11:2612:28दिन
मंगल12:2813:30दिन
सूर्य13:3014:32दिन
शुक्र14:3215:34दिन
बुध15:3416:36दिन
चंद्र16:3617:38दिन
शनि17:3818:40दिन
गुरु18:4019:38रात
मंगल19:3820:36रात
सूर्य20:3621:34रात
शुक्र21:3422:32रात
बुध22:3223:30रात
चंद्र23:3000:28रात
शनि00:2801:26रात
गुरु01:2602:24रात
मंगल02:2403:22रात
सूर्य03:2204:20रात
शुक्र04:2005:18रात
बुध05:1806:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2439° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।