25 जनवरी 2028 को पुष्कर का पंचांग

मंगलवार, 25 जनवरी 2028, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 25 जनवरी 2028 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (18:17 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (13:59 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:19 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 15:26 से 16:47 तक है।

दिन और रात
दिन 07:19 – 18:08
रात 07:19 तक
तिथि
चतुर्दशी, 18:17 तक
अमावस्या
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 13:59 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जनवरी 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 18:17 तक
अमावस्या 20:42, 26 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 16:48, 26 जन॰ तक
योग
हर्षण 12:50 तक
वज्रअशुभ 13:31, 26 जन॰ तक
करण
शकुनि 18:17 तक
चतुष्पद 07:28, 26 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 20:40 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:19
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
06:22
चंद्रास्त
17:04
दिनमान
10h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:34 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
15:26 – 16:47
यमगंड
10:01 – 11:22
गुलिक काल
12:44 – 14:05

25 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:19 – 08:40टालें
उद्वेग08:40 – 10:01टालें
चर10:01 – 11:22सामान्य
लाभ11:22 – 12:44शुभ
अमृत12:44 – 14:05शुभ
काल14:05 – 15:26टालें
शुभ15:26 – 16:47शुभ
रोग16:47 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:08 – 19:47टालें
लाभ19:47 – 21:26शुभ
उद्वेग21:26 – 23:05टालें
शुभ23:05 – 00:43शुभ
अमृत00:43 – 02:22शुभ
चर02:22 – 04:01सामान्य
रोग04:01 – 05:40टालें
काल05:40 – 07:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:1908:13दिन
सूर्य08:1309:07दिन
शुक्र09:0710:01दिन
बुध10:0110:55दिन
चंद्र10:5511:49दिन
शनि11:4912:44दिन
गुरु12:4413:38दिन
मंगल13:3814:32दिन
सूर्य14:3215:26दिन
शुक्र15:2616:20दिन
बुध16:2017:14दिन
चंद्र17:1418:08दिन
शनि18:0819:14रात
गुरु19:1420:20रात
मंगल20:2021:26रात
सूर्य21:2622:32रात
शुक्र22:3223:37रात
बुध23:3700:43रात
चंद्र00:4301:49रात
शनि01:4902:55रात
गुरु02:5504:01रात
मंगल04:0105:07रात
सूर्य05:0706:13रात
शुक्र06:1307:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2491° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।