13 मई 2029 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 13 मई 2029, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 13 मई 2029 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (19:12 तक), नक्षत्र भरणी (14:56 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 17:30 से 19:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 19:10
रात 05:45 तक
तिथि
अमावस्या, 19:12 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 14:56 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 मई 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 19:12 तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:56, 14 मई तक
नक्षत्र
भरणी 14:56 तक
कृत्तिका 17:18, 14 मई तक
योग
सौभाग्य 11:18 तक
शोभन 11:46, 14 मई तक
करण
चतुष्पद 06:13 तक
नाग 19:12 तक
किंस्तुघ्न 08:06, 14 मई तक
चंद्र राशि
मेष 21:33 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
05:15
चंद्रास्त
19:10
दिनमान
13h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
17:30 – 19:10
यमगंड
12:28 – 14:08
गुलिक काल
15:49 – 17:30

13 मई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:45 – 07:26टालें
चर07:26 – 09:07सामान्य
लाभ09:07 – 10:47शुभ
अमृत10:47 – 12:28शुभ
काल12:28 – 14:08टालें
शुभ14:08 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:30टालें
उद्वेग17:30 – 19:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:10 – 20:29शुभ
अमृत20:29 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:08सामान्य
रोग23:08 – 00:28टालें
काल00:28 – 01:47टालें
लाभ01:47 – 03:06शुभ
उद्वेग03:06 – 04:26टालें
शुभ04:26 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4506:53दिन
शुक्र06:5308:00दिन
बुध08:0009:07दिन
चंद्र09:0710:14दिन
शनि10:1411:21दिन
गुरु11:2112:28दिन
मंगल12:2813:35दिन
सूर्य13:3514:42दिन
शुक्र14:4215:49दिन
बुध15:4916:56दिन
चंद्र16:5618:03दिन
शनि18:0319:10दिन
गुरु19:1020:03रात
मंगल20:0320:56रात
सूर्य20:5621:49रात
शुक्र21:4922:42रात
बुध22:4223:35रात
चंद्र23:3500:28रात
शनि00:2801:20रात
गुरु01:2002:13रात
मंगल02:1303:06रात
सूर्य03:0603:59रात
शुक्र03:5904:52रात
बुध04:5205:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
15 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मई 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 मई 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 मई 2029वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
31 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जून 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2672° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।