7 सितंबर 2029 को पुष्कर का पंचांग

शुक्रवार, 7 सितंबर 2029, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 7 सितंबर 2029 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (19:12 तक), नक्षत्र मघा (02:25, 8 सित॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 10:55 से 12:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:45
रात 06:14 तक
तिथि
चतुर्दशी, 19:12 तक
अमावस्या
नक्षत्र
मघा, 02:25 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 19:12 तक
अमावस्या 16:14, 8 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 02:25, 8 सित॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 00:07, 9 सित॰ तक
योग
शिव 14:11 तक
सिद्ध 10:45, 8 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:31 तक
शकुनि 19:12 तक
चतुष्पद 05:46, 8 सित॰ तक
नाग 16:14, 8 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
04:50
चंद्रास्त
17:47
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
10:55 – 12:29
यमगंड
15:37 – 17:11
गुलिक काल
07:47 – 09:21

7 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:14 – 07:47सामान्य
लाभ07:47 – 09:21शुभ
अमृत09:21 – 10:55शुभ
काल10:55 – 12:29टालें
शुभ12:29 – 14:03शुभ
रोग14:03 – 15:37टालें
उद्वेग15:37 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:45 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:37टालें
लाभ21:37 – 23:03शुभ
उद्वेग23:03 – 00:29टालें
शुभ00:29 – 01:55शुभ
अमृत01:55 – 03:22शुभ
चर03:22 – 04:48सामान्य
रोग04:48 – 06:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1407:16दिन
बुध07:1608:19दिन
चंद्र08:1909:21दिन
शनि09:2110:24दिन
गुरु10:2411:26दिन
मंगल11:2612:29दिन
सूर्य12:2913:32दिन
शुक्र13:3214:34दिन
बुध14:3415:37दिन
चंद्र15:3716:39दिन
शनि16:3917:42दिन
गुरु17:4218:45दिन
मंगल18:4519:42रात
सूर्य19:4220:39रात
शुक्र20:3921:37रात
बुध21:3722:34रात
चंद्र22:3423:32रात
शनि23:3200:29रात
गुरु00:2901:27रात
मंगल01:2702:24रात
सूर्य02:2403:22रात
शुक्र03:2204:19रात
बुध04:1905:17रात
चंद्र05:1706:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2717° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।