5 नवंबर 2026 को रायपुर का पंचांग

गुरुवार, 5 नवंबर 2026, रायपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को रायपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (10:36 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:56, 6 नव॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 13:11 से 14:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 17:25
रात 06:08 तक
तिथि
एकादशी, 10:36 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:56 तक
हस्त
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 10:36 तक
कृष्ण द्वादशी 10:31, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 04:43, 7 नव॰ तक
योग
इंद्र 06:26 तक
वैधृतिअशुभ 05:09, 6 नव॰ तक
विष्कंभअशुभ 04:10, 7 नव॰ तक
करण
बालव 10:36 तक
कौलव 22:30 तक
तैतिल 10:31, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 09:34 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
02:25
चंद्रास्त
14:47
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:17
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
13:11 – 14:36
यमगंड
06:08 – 07:32
गुलिक काल
08:57 – 10:22

5 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:32शुभ
रोग07:32 – 08:57टालें
उद्वेग08:57 – 10:22टालें
चर10:22 – 11:46सामान्य
लाभ11:46 – 13:11शुभ
अमृत13:11 – 14:36शुभ
काल14:36 – 16:00टालें
शुभ16:00 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:25 – 19:00शुभ
चर19:00 – 20:36सामान्य
रोग20:36 – 22:11टालें
काल22:11 – 23:47टालें
लाभ23:47 – 01:22शुभ
उद्वेग01:22 – 02:58टालें
शुभ02:58 – 04:33शुभ
अमृत04:33 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:04दिन
मंगल07:0408:01दिन
सूर्य08:0108:57दिन
शुक्र08:5709:54दिन
बुध09:5410:50दिन
चंद्र10:5011:46दिन
शनि11:4612:43दिन
गुरु12:4313:39दिन
मंगल13:3914:36दिन
सूर्य14:3615:32दिन
शुक्र15:3216:29दिन
बुध16:2917:25दिन
चंद्र17:2518:29रात
शनि18:2919:32रात
गुरु19:3220:36रात
मंगल20:3621:40रात
सूर्य21:4022:43रात
शुक्र22:4323:47रात
बुध23:4700:50रात
चंद्र00:5001:54रात
शनि01:5402:58रात
गुरु02:5804:01रात
मंगल04:0105:05रात
सूर्य05:0506:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां रायपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2320° (लाहिड़ी)। समय रायपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।