20 जनवरी 2028 को रामेश्वरम का पंचांग

गुरुवार, 20 जनवरी 2028, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 जनवरी 2028 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (12:04 तक), नक्षत्र विशाखा (06:22, 21 जन॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 13:51 से 15:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 18:13
रात 06:33 तक
तिथि
नवमी, 12:04 तक
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 06:22 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 12:04 तक
कृष्ण दशमी 12:17, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 06:22, 21 जन॰ तक
अनुराधा 07:35, 22 जन॰ तक
योग
शूलअशुभ 13:55 तक
गंडअशुभ 12:54, 21 जन॰ तक
करण
गर 12:04 तक
वणिज 00:06, 21 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:17, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
तुला 00:09, 21 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
01:02
चंद्रास्त
12:56
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
13:51 – 15:18
यमगंड
06:33 – 08:01
गुलिक काल
09:28 – 10:56

20 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:33 – 08:01शुभ
रोग08:01 – 09:28टालें
उद्वेग09:28 – 10:56टालें
चर10:56 – 12:23सामान्य
लाभ12:23 – 13:51शुभ
अमृत13:51 – 15:18शुभ
काल15:18 – 16:45टालें
शुभ16:45 – 18:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:13 – 19:46शुभ
चर19:46 – 21:18सामान्य
रोग21:18 – 22:51टालें
काल22:51 – 00:23टालें
लाभ00:23 – 01:56शुभ
उद्वेग01:56 – 03:28टालें
शुभ03:28 – 05:01शुभ
अमृत05:01 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3307:32दिन
मंगल07:3208:30दिन
सूर्य08:3009:28दिन
शुक्र09:2810:26दिन
बुध10:2611:25दिन
चंद्र11:2512:23दिन
शनि12:2313:21दिन
गुरु13:2114:20दिन
मंगल14:2015:18दिन
सूर्य15:1816:16दिन
शुक्र16:1617:15दिन
बुध17:1518:13दिन
चंद्र18:1319:15रात
शनि19:1520:16रात
गुरु20:1621:18रात
मंगल21:1822:20रात
सूर्य22:2023:21रात
शुक्र23:2100:23रात
बुध00:2301:25रात
चंद्र01:2502:27रात
शनि02:2703:28रात
गुरु03:2804:30रात
मंगल04:3005:32रात
सूर्य05:3206:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2489° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।