14 मार्च 2025 को रांची का पंचांग

शुक्रवार, 14 मार्च 2025, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 14 मार्च 2025 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (12:24 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (06:19 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 10:28 से 11:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:57
रात 05:57 तक
तिथि
पूर्णिमा, 12:24 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मार्च 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
पूर्णिमा 12:24 तक
कृष्ण प्रतिपदा 14:33, 15 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 08:54, 15 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 13:23 तक
गंडअशुभ 13:59, 15 मार्च तक
करण
बव 12:24 तक
बालव 01:26, 15 मार्च तक
कौलव 14:33, 15 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 12:56 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
18:05
चंद्रास्त
05:54
दिनमान
11h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:28 – 11:58
यमगंड
14:57 – 16:27
गुलिक काल
07:28 – 08:58

14 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:58 – 07:28सामान्य
लाभ07:28 – 08:58शुभ
अमृत08:58 – 10:28शुभ
काल10:28 – 11:58टालें
शुभ11:58 – 13:27शुभ
रोग13:27 – 14:57टालें
उद्वेग14:57 – 16:27टालें
चर16:27 – 17:57सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:57 – 19:27टालें
काल19:27 – 20:57टालें
लाभ20:57 – 22:27शुभ
उद्वेग22:27 – 23:57टालें
शुभ23:57 – 01:27शुभ
अमृत01:27 – 02:57शुभ
चर02:57 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 05:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5806:58दिन
बुध06:5807:58दिन
चंद्र07:5808:58दिन
शनि08:5809:58दिन
गुरु09:5810:58दिन
मंगल10:5811:58दिन
सूर्य11:5812:57दिन
शुक्र12:5713:57दिन
बुध13:5714:57दिन
चंद्र14:5715:57दिन
शनि15:5716:57दिन
गुरु16:5717:57दिन
मंगल17:5718:57रात
सूर्य18:5719:57रात
शुक्र19:5720:57रात
बुध20:5721:57रात
चंद्र21:5722:57रात
शनि22:5723:57रात
गुरु23:5700:57रात
मंगल00:5701:57रात
सूर्य01:5702:57रात
शुक्र02:5703:57रात
बुध03:5704:57रात
चंद्र04:5705:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2091° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।