15 मार्च 2025 को रांची का पंचांग

शनिवार, 15 मार्च 2025, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 मार्च 2025 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (14:33 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (08:54 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 08:57 से 10:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 17:57
रात 05:56 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:33 तक
द्वितीया
नक्षत्र
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 मार्च 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 14:33 तक
कृष्ण द्वितीया 16:58, 16 मार्च तक
नक्षत्र
हस्त 11:45, 16 मार्च तक
योग
गंडअशुभ 13:59 तक
वृद्धि 14:48, 16 मार्च तक
करण
कौलव 14:33 तक
तैतिल 03:44, 16 मार्च तक
गर 16:58, 16 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
18:55
चंद्रास्त
06:23
दिनमान
12h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:57 – 10:27
यमगंड
13:27 – 14:57
गुलिक काल
05:57 – 07:27

15 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:57 – 07:27टालें
शुभ07:27 – 08:57शुभ
रोग08:57 – 10:27टालें
उद्वेग10:27 – 11:57टालें
चर11:57 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:57शुभ
अमृत14:57 – 16:27शुभ
काल16:27 – 17:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:57 – 19:27शुभ
उद्वेग19:27 – 20:57टालें
शुभ20:57 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 23:57शुभ
चर23:57 – 01:27सामान्य
रोग01:27 – 02:57टालें
काल02:57 – 04:26टालें
लाभ04:26 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5706:57दिन
गुरु06:5707:57दिन
मंगल07:5708:57दिन
सूर्य08:5709:57दिन
शुक्र09:5710:57दिन
बुध10:5711:57दिन
चंद्र11:5712:57दिन
शनि12:5713:57दिन
गुरु13:5714:57दिन
मंगल14:5715:57दिन
सूर्य15:5716:57दिन
शुक्र16:5717:57दिन
बुध17:5718:57रात
चंद्र18:5719:57रात
शनि19:5720:57रात
गुरु20:5721:57रात
मंगल21:5722:57रात
सूर्य22:5723:57रात
शुक्र23:5700:57रात
बुध00:5701:57रात
चंद्र01:5702:57रात
शनि02:5703:56रात
गुरु03:5604:56रात
मंगल04:5605:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2091° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।