9 अक्टूबर 2025 को रांची का पंचांग

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (22:54 तक), नक्षत्र भरणी (20:02 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:43 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 13:03 से 14:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:43 – 17:28
रात 05:43 तक
तिथि
तृतीया, 22:54 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
भरणी, 20:02 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 22:54 तक
कृष्ण चतुर्थी 19:38, 10 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 20:02 तक
कृत्तिका 17:31, 10 अक्टू॰ तक
योग
वज्रअशुभ 21:32 तक
सिद्धि 17:41, 10 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 12:38 तक
विष्टि (भद्रा) 22:54 तक
बव 09:14, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मेष 01:23, 10 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
19:01
चंद्रास्त
07:49
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
13:03 – 14:32
यमगंड
05:43 – 07:11
गुलिक काल
08:39 – 10:07

9 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:43 – 07:11शुभ
रोग07:11 – 08:39टालें
उद्वेग08:39 – 10:07टालें
चर10:07 – 11:35सामान्य
लाभ11:35 – 13:03शुभ
अमृत13:03 – 14:32शुभ
काल14:32 – 16:00टालें
शुभ16:00 – 17:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:28 – 19:00शुभ
चर19:00 – 20:32सामान्य
रोग20:32 – 22:04टालें
काल22:04 – 23:36टालें
लाभ23:36 – 01:07शुभ
उद्वेग01:07 – 02:39टालें
शुभ02:39 – 04:11शुभ
अमृत04:11 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4306:42दिन
मंगल06:4207:40दिन
सूर्य07:4008:39दिन
शुक्र08:3909:38दिन
बुध09:3810:37दिन
चंद्र10:3711:35दिन
शनि11:3512:34दिन
गुरु12:3413:33दिन
मंगल13:3314:32दिन
सूर्य14:3215:30दिन
शुक्र15:3016:29दिन
बुध16:2917:28दिन
चंद्र17:2818:29रात
शनि18:2919:30रात
गुरु19:3020:32रात
मंगल20:3221:33रात
सूर्य21:3322:34रात
शुक्र22:3423:36रात
बुध23:3600:37रात
चंद्र00:3701:38रात
शनि01:3802:39रात
गुरु02:3903:41रात
मंगल03:4104:42रात
सूर्य04:4205:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2171° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।