31 मार्च 2027 को रांची का पंचांग

बुधवार, 31 मार्च 2027, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 मार्च 2027 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (22:16 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (06:21 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 11:53 से 13:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:03
रात 05:41 तक
तिथि
नवमी, 22:16 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मार्च 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 22:16 तक
कृष्ण दशमी 00:45, 2 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 09:25, 1 अप्रैल तक
योग
परिघअशुभ 07:53 तक
शिव 08:52, 1 अप्रैल तक
करण
तैतिल 08:58 तक
गर 22:16 तक
वणिज 11:33, 1 अप्रैल तक
चंद्र राशि
धनु 13:07 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
01:24
चंद्रास्त
12:15
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:53 – 13:25
यमगंड
07:15 – 08:47
गुलिक काल
10:20 – 11:53

31 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:42 – 07:15शुभ
अमृत07:15 – 08:47शुभ
काल08:47 – 10:20टालें
शुभ10:20 – 11:53शुभ
रोग11:53 – 13:25टालें
उद्वेग13:25 – 14:58टालें
चर14:58 – 16:31सामान्य
लाभ16:31 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:03 – 19:31टालें
शुभ19:31 – 20:58शुभ
अमृत20:58 – 22:25शुभ
चर22:25 – 23:52सामान्य
रोग23:52 – 01:19टालें
काल01:19 – 02:47टालें
लाभ02:47 – 04:14शुभ
उद्वेग04:14 – 05:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4206:44दिन
चंद्र06:4407:46दिन
शनि07:4608:47दिन
गुरु08:4709:49दिन
मंगल09:4910:51दिन
सूर्य10:5111:53दिन
शुक्र11:5312:54दिन
बुध12:5413:56दिन
चंद्र13:5614:58दिन
शनि14:5816:00दिन
गुरु16:0017:02दिन
मंगल17:0218:03दिन
सूर्य18:0319:01रात
शुक्र19:0120:00रात
बुध20:0020:58रात
चंद्र20:5821:56रात
शनि21:5622:54रात
गुरु22:5423:52रात
मंगल23:5200:50रात
सूर्य00:5001:49रात
शुक्र01:4902:47रात
बुध02:4703:45रात
चंद्र03:4504:43रात
शनि04:4305:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2376° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।