12 अक्टूबर 2027 को रांची का पंचांग

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2027, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2027 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (16:14 तक), नक्षत्र शतभिषा (18:55 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 14:30 से 15:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 17:26
रात 05:44 तक
तिथि
द्वादशी, 16:14 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
शतभिषा, 18:55 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 16:14 तक
शुक्ल त्रयोदशी 17:48, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 18:55 तक
पूर्वा भाद्रपद 20:59, 13 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 16:20 तक
वृद्धि 16:31, 13 अक्टू॰ तक
करण
बालव 16:14 तक
कौलव 05:05, 13 अक्टू॰ तक
तैतिल 17:48, 13 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
15:24
चंद्रास्त
02:43
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:06 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
14:30 – 15:58
यमगंड
08:39 – 10:07
गुलिक काल
11:35 – 13:02

12 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:44 – 07:12टालें
उद्वेग07:12 – 08:39टालें
चर08:39 – 10:07सामान्य
लाभ10:07 – 11:35शुभ
अमृत11:35 – 13:02शुभ
काल13:02 – 14:30टालें
शुभ14:30 – 15:58शुभ
रोग15:58 – 17:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:26 – 18:58टालें
लाभ18:58 – 20:30शुभ
उद्वेग20:30 – 22:03टालें
शुभ22:03 – 23:35शुभ
अमृत23:35 – 01:07शुभ
चर01:07 – 02:40सामान्य
रोग02:40 – 04:12टालें
काल04:12 – 05:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4406:42दिन
सूर्य06:4207:41दिन
शुक्र07:4108:39दिन
बुध08:3909:38दिन
चंद्र09:3810:36दिन
शनि10:3611:35दिन
गुरु11:3512:33दिन
मंगल12:3313:32दिन
सूर्य13:3214:30दिन
शुक्र14:3015:29दिन
बुध15:2916:27दिन
चंद्र16:2717:26दिन
शनि17:2618:27रात
गुरु18:2719:29रात
मंगल19:2920:30रात
सूर्य20:3021:32रात
शुक्र21:3222:33रात
बुध22:3323:35रात
चंद्र23:3500:36रात
शनि00:3601:38रात
गुरु01:3802:40रात
मंगल02:4003:41रात
सूर्य03:4104:43रात
शुक्र04:4305:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2451° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।