4 फ़रवरी 2028 को रांची का पंचांग

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2028, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2028 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (12:47 तक), नक्षत्र भरणी (12:39 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:37 पर है। राहुकाल 10:39 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:37
रात 06:27 तक
तिथि
अष्टमी, 12:47 तक
नवमी
नक्षत्र
भरणी, 12:39 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 12:47 तक
शुक्ल नवमी 12:26, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 12:39 तक
कृत्तिका 12:55, 5 फ़र॰ तक
योग
शुक्ल 17:06 तक
ब्रह्म 15:32, 5 फ़र॰ तक
करण
बव 12:47 तक
बालव 00:43, 5 फ़र॰ तक
कौलव 12:26, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 18:48 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:37
चंद्रोदय
11:17
चंद्रास्त
00:13
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
10:39 – 12:02
यमगंड
14:50 – 16:13
गुलिक काल
07:51 – 09:15

4 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:27 – 07:51सामान्य
लाभ07:51 – 09:15शुभ
अमृत09:15 – 10:39शुभ
काल10:39 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:26शुभ
रोग13:26 – 14:50टालें
उद्वेग14:50 – 16:13टालें
चर16:13 – 17:37सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:37 – 19:13टालें
काल19:13 – 20:49टालें
लाभ20:49 – 22:26शुभ
उद्वेग22:26 – 00:02टालें
शुभ00:02 – 01:38शुभ
अमृत01:38 – 03:14शुभ
चर03:14 – 04:51सामान्य
रोग04:51 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2707:23दिन
बुध07:2308:19दिन
चंद्र08:1909:15दिन
शनि09:1510:11दिन
गुरु10:1111:06दिन
मंगल11:0612:02दिन
सूर्य12:0212:58दिन
शुक्र12:5813:54दिन
बुध13:5414:50दिन
चंद्र14:5015:45दिन
शनि15:4516:41दिन
गुरु16:4117:37दिन
मंगल17:3718:41रात
सूर्य18:4119:45रात
शुक्र19:4520:49रात
बुध20:4921:54रात
चंद्र21:5422:58रात
शनि22:5800:02रात
गुरु00:0201:06रात
मंगल01:0602:10रात
सूर्य02:1003:14रात
शुक्र03:1404:19रात
बुध04:1905:23रात
चंद्र05:2306:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2495° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।