19 मार्च 2028 को रांची का पंचांग

रविवार, 19 मार्च 2028, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 19 मार्च 2028 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (19:17 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (02:10, 20 मार्च तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 16:28 से 17:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 17:59
रात 05:52 तक
तिथि
नवमी, 19:17 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 02:10 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 मार्च 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 19:17 तक
कृष्ण दशमी 21:36, 20 मार्च तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 02:10, 20 मार्च तक
उत्तराषाढ़ा 05:04, 21 मार्च तक
योग
वरीयान 22:08 तक
परिघअशुभ 22:55, 20 मार्च तक
करण
तैतिल 06:19 तक
गर 19:17 तक
वणिज 08:24, 20 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
01:25
चंद्रास्त
12:15
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
16:28 – 17:59
यमगंड
11:56 – 13:27
गुलिक काल
14:58 – 16:28

19 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:53 – 07:24टालें
चर07:24 – 08:55सामान्य
लाभ08:55 – 10:25शुभ
अमृत10:25 – 11:56शुभ
काल11:56 – 13:27टालें
शुभ13:27 – 14:58शुभ
रोग14:58 – 16:28टालें
उद्वेग16:28 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:59 – 19:28शुभ
अमृत19:28 – 20:57शुभ
चर20:57 – 22:26सामान्य
रोग22:26 – 23:56टालें
काल23:56 – 01:25टालें
लाभ01:25 – 02:54शुभ
उद्वेग02:54 – 04:23टालें
शुभ04:23 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5306:54दिन
शुक्र06:5407:54दिन
बुध07:5408:55दिन
चंद्र08:5509:55दिन
शनि09:5510:56दिन
गुरु10:5611:56दिन
मंगल11:5612:57दिन
सूर्य12:5713:57दिन
शुक्र13:5714:58दिन
बुध14:5815:58दिन
चंद्र15:5816:59दिन
शनि16:5917:59दिन
गुरु17:5918:58रात
मंगल18:5819:58रात
सूर्य19:5820:57रात
शुक्र20:5721:57रात
बुध21:5722:56रात
चंद्र22:5623:56रात
शनि23:5600:55रात
गुरु00:5501:54रात
मंगल01:5402:54रात
सूर्य02:5403:53रात
शुक्र03:5304:53रात
बुध04:5305:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2512° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।