10 मार्च 2029 को रांची का पंचांग

शनिवार, 10 मार्च 2029, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 10 मार्च 2029 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (02:16, 11 मार्च तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (05:34, 11 मार्च तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 09:00 से 10:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 17:55
रात 06:01 तक
तिथि
एकादशी, 02:16 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 05:34 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 मार्च 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:16, 11 मार्च तक
कृष्ण द्वादशी 03:42, 12 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 05:34, 11 मार्च तक
श्रवण 07:36, 12 मार्च तक
योग
वरीयान 18:05 तक
परिघअशुभ 17:59, 11 मार्च तक
करण
बव 13:43 तक
बालव 02:16, 11 मार्च तक
कौलव 14:56, 11 मार्च तक
चंद्र राशि
धनु 10:19 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
02:43
चंद्रास्त
13:50
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
09:00 – 10:29
यमगंड
13:28 – 14:57
गुलिक काल
06:02 – 07:31

10 मार्च 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:02 – 07:31टालें
शुभ07:31 – 09:00शुभ
रोग09:00 – 10:29टालें
उद्वेग10:29 – 11:59टालें
चर11:59 – 13:28सामान्य
लाभ13:28 – 14:57शुभ
अमृत14:57 – 16:26शुभ
काल16:26 – 17:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:55 – 19:26शुभ
उद्वेग19:26 – 20:57टालें
शुभ20:57 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 23:58शुभ
चर23:58 – 01:29सामान्य
रोग01:29 – 03:00टालें
काल03:00 – 04:30टालें
लाभ04:30 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0207:01दिन
गुरु07:0108:01दिन
मंगल08:0109:00दिन
सूर्य09:0010:00दिन
शुक्र10:0010:59दिन
बुध10:5911:59दिन
चंद्र11:5912:58दिन
शनि12:5813:58दिन
गुरु13:5814:57दिन
मंगल14:5715:56दिन
सूर्य15:5616:56दिन
शुक्र16:5617:55दिन
बुध17:5518:56रात
चंद्र18:5619:56रात
शनि19:5620:57रात
गुरु20:5721:57रात
मंगल21:5722:58रात
सूर्य22:5823:58रात
शुक्र23:5800:59रात
बुध00:5901:59रात
चंद्र01:5903:00रात
शनि03:0004:00रात
गुरु04:0005:01रात
मंगल05:0106:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 मार्च 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 मार्च 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 मार्च 2029अधिक चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
2 अप्रैल 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अप्रैल 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2648° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।