31 जनवरी 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

शुक्रवार, 31 जनवरी 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 31 जनवरी 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (13:59 तक), नक्षत्र शतभिषा (04:14, 1 फ़र॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 11:09 से 12:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:52
रात 07:07 तक
तिथि
द्वितीया, 13:59 तक
तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा, 04:14 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 13:59 तक
शुक्ल तृतीया 11:38, 1 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 04:14, 1 फ़र॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:33, 2 फ़र॰ तक
योग
वरीयान 15:32 तक
परिघअशुभ 12:24, 1 फ़र॰ तक
करण
कौलव 13:59 तक
तैतिल 00:49, 1 फ़र॰ तक
गर 11:38, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
08:26
चंद्रास्त
19:55
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:08 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
11:09 – 12:30
यमगंड
15:11 – 16:32
गुलिक काल
08:28 – 09:49

31 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:07 – 08:28सामान्य
लाभ08:28 – 09:49शुभ
अमृत09:49 – 11:09शुभ
काल11:09 – 12:30टालें
शुभ12:30 – 13:51शुभ
रोग13:51 – 15:11टालें
उद्वेग15:11 – 16:32टालें
चर16:32 – 17:52सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:52 – 19:32टालें
काल19:32 – 21:11टालें
लाभ21:11 – 22:50शुभ
उद्वेग22:50 – 00:30टालें
शुभ00:30 – 02:09शुभ
अमृत02:09 – 03:48शुभ
चर03:48 – 05:27सामान्य
रोग05:27 – 07:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0708:01दिन
बुध08:0108:55दिन
चंद्र08:5509:49दिन
शनि09:4910:42दिन
गुरु10:4211:36दिन
मंगल11:3612:30दिन
सूर्य12:3013:24दिन
शुक्र13:2414:17दिन
बुध14:1715:11दिन
चंद्र15:1116:05दिन
शनि16:0516:59दिन
गुरु16:5917:52दिन
मंगल17:5218:59रात
सूर्य18:5920:05रात
शुक्र20:0521:11रात
बुध21:1122:17रात
चंद्र22:1723:23रात
शनि23:2300:30रात
गुरु00:3001:36रात
मंगल01:3602:42रात
सूर्य02:4203:48रात
शुक्र03:4804:54रात
बुध04:5406:01रात
चंद्र06:0107:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2075° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।