8 फ़रवरी 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

शनिवार, 8 फ़रवरी 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (20:16 तक), नक्षत्र मृगशिरा (18:07 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 09:46 से 11:09 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 17:59
रात 07:01 तक
तिथि
एकादशी, 20:16 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 18:07 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:16 तक
शुक्ल द्वादशी 19:25, 9 फ़र॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 17:53, 9 फ़र॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 14:04 तक
विष्कंभअशुभ 12:06, 9 फ़र॰ तक
करण
वणिज 08:49 तक
विष्टि (भद्रा) 20:16 तक
बव 07:48, 9 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
13:41
चंद्रास्त
03:42
दिनमान
10h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
09:46 – 11:09
यमगंड
13:53 – 15:15
गुलिक काल
07:02 – 08:24

8 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:02 – 08:24टालें
शुभ08:24 – 09:46शुभ
रोग09:46 – 11:09टालें
उद्वेग11:09 – 12:31टालें
चर12:31 – 13:53सामान्य
लाभ13:53 – 15:15शुभ
अमृत15:15 – 16:37शुभ
काल16:37 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:59 – 19:37शुभ
उद्वेग19:37 – 21:15टालें
शुभ21:15 – 22:53शुभ
अमृत22:53 – 00:30शुभ
चर00:30 – 02:08सामान्य
रोग02:08 – 03:46टालें
काल03:46 – 05:24टालें
लाभ05:24 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0207:57दिन
गुरु07:5708:52दिन
मंगल08:5209:46दिन
सूर्य09:4610:41दिन
शुक्र10:4111:36दिन
बुध11:3612:31दिन
चंद्र12:3113:25दिन
शनि13:2514:20दिन
गुरु14:2015:15दिन
मंगल15:1516:10दिन
सूर्य16:1017:04दिन
शुक्र17:0417:59दिन
बुध17:5919:04रात
चंद्र19:0420:10रात
शनि20:1021:15रात
गुरु21:1522:20रात
मंगल22:2023:25रात
सूर्य23:2500:30रात
शुक्र00:3001:35रात
बुध01:3502:41रात
चंद्र02:4103:46रात
शनि03:4604:51रात
गुरु04:5105:56रात
मंगल05:5607:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2078° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।