2 मार्च 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 2 मार्च 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 मार्च 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (21:02 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (08:59 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 16:49 से 18:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 18:16
रात 06:40 तक
तिथि
तृतीया, 21:02 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रेवती, 06:39 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मार्च 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 21:02 तक
शुक्ल चतुर्थी 18:02, 3 मार्च तक
नक्षत्र
रेवती 06:39, 3 मार्च तक
अश्विनी 04:29, 4 मार्च तक
योग
शुभ 12:39 तक
शुक्ल 08:57, 3 मार्च तक
करण
तैतिल 10:35 तक
गर 21:02 तक
वणिज 07:31, 3 मार्च तक
चंद्र राशि
मीन 06:39, 3 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
08:00
चंद्रास्त
20:58
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
16:49 – 18:16
यमगंड
12:29 – 13:55
गुलिक काल
15:22 – 16:49

2 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:41 – 08:08टालें
चर08:08 – 09:35सामान्य
लाभ09:35 – 11:02शुभ
अमृत11:02 – 12:29शुभ
काल12:29 – 13:55टालें
शुभ13:55 – 15:22शुभ
रोग15:22 – 16:49टालें
उद्वेग16:49 – 18:16टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:16 – 19:49शुभ
अमृत19:49 – 21:22शुभ
चर21:22 – 22:55सामान्य
रोग22:55 – 00:28टालें
काल00:28 – 02:01टालें
लाभ02:01 – 03:34शुभ
उद्वेग03:34 – 05:07टालें
शुभ05:07 – 06:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4107:39दिन
शुक्र07:3908:37दिन
बुध08:3709:35दिन
चंद्र09:3510:33दिन
शनि10:3311:31दिन
गुरु11:3112:29दिन
मंगल12:2913:27दिन
सूर्य13:2714:24दिन
शुक्र14:2415:22दिन
बुध15:2216:20दिन
चंद्र16:2017:18दिन
शनि17:1818:16दिन
गुरु18:1619:18रात
मंगल19:1820:20रात
सूर्य20:2021:22रात
शुक्र21:2222:24रात
बुध22:2423:26रात
चंद्र23:2600:28रात
शनि00:2801:30रात
गुरु01:3002:32रात
मंगल02:3203:34रात
सूर्य03:3404:36रात
शुक्र04:3605:38रात
बुध05:3806:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2086° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।