23 अगस्त 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

शनिवार, 23 अगस्त 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 23 अगस्त 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (11:36 तक), नक्षत्र मघा (00:55, 24 अग॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 09:03 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:49
रात 05:49 तक
तिथि
अमावस्या, 11:36 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा, 00:55 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अगस्त 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 11:36 तक
शुक्ल प्रतिपदा 11:48, 24 अग॰ तक
नक्षत्र
मघा 00:55, 24 अग॰ तक
योग
परिघअशुभ 13:19 तक
शिव 12:29, 24 अग॰ तक
करण
नाग 11:36 तक
किंस्तुघ्न 23:38 तक
बव 11:48, 24 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
05:37
चंद्रास्त
19:00
दिनमान
13h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
09:03 – 10:41
यमगंड
13:56 – 15:34
गुलिक काल
05:48 – 07:26

23 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:48 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 09:03शुभ
रोग09:03 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:19टालें
चर12:19 – 13:56सामान्य
लाभ13:56 – 15:34शुभ
अमृत15:34 – 17:12शुभ
काल17:12 – 18:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:49 – 20:12शुभ
उद्वेग20:12 – 21:34टालें
शुभ21:34 – 22:57शुभ
अमृत22:57 – 00:19शुभ
चर00:19 – 01:41सामान्य
रोग01:41 – 03:04टालें
काल03:04 – 04:26टालें
लाभ04:26 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4806:53दिन
गुरु06:5307:58दिन
मंगल07:5809:03दिन
सूर्य09:0310:09दिन
शुक्र10:0911:14दिन
बुध11:1412:19दिन
चंद्र12:1913:24दिन
शनि13:2414:29दिन
गुरु14:2915:34दिन
मंगल15:3416:39दिन
सूर्य16:3917:44दिन
शुक्र17:4418:49दिन
बुध18:4919:44रात
चंद्र19:4420:39रात
शनि20:3921:34रात
गुरु21:3422:29रात
मंगल22:2923:24रात
सूर्य23:2400:19रात
शुक्र00:1901:14रात
बुध01:1402:09रात
चंद्र02:0903:04रात
शनि03:0403:59रात
गुरु03:5904:54रात
मंगल04:5405:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2153° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।