10 नवंबर 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

सोमवार, 10 नवंबर 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 नवंबर 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (00:08, 11 नव॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (18:48 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 07:58 से 09:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:23
रात 06:38 तक
तिथि
षष्ठी, 00:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 18:48 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 00:08, 11 नव॰ तक
कृष्ण सप्तमी 23:09, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 18:18, 11 नव॰ तक
योग
साध्य 12:05 तक
शुभ 09:44, 11 नव॰ तक
करण
गर 12:56 तक
वणिज 00:08, 11 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 11:32, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 13:03 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
22:07
चंद्रास्त
11:45
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
07:58 – 09:19
यमगंड
10:39 – 12:00
गुलिक काल
13:21 – 14:41

10 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:37 – 07:58शुभ
काल07:58 – 09:19टालें
शुभ09:19 – 10:39शुभ
रोग10:39 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:21टालें
चर13:21 – 14:41सामान्य
लाभ14:41 – 16:02शुभ
अमृत16:02 – 17:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:23 – 19:02सामान्य
रोग19:02 – 20:42टालें
काल20:42 – 22:21टालें
लाभ22:21 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:40टालें
शुभ01:40 – 03:19शुभ
अमृत03:19 – 04:59शुभ
चर04:59 – 06:38सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3707:31दिन
शनि07:3108:25दिन
गुरु08:2509:19दिन
मंगल09:1910:13दिन
सूर्य10:1311:06दिन
शुक्र11:0612:00दिन
बुध12:0012:54दिन
चंद्र12:5413:48दिन
शनि13:4814:41दिन
गुरु14:4115:35दिन
मंगल15:3516:29दिन
सूर्य16:2917:23दिन
शुक्र17:2318:29रात
बुध18:2919:35रात
चंद्र19:3520:42रात
शनि20:4221:48रात
गुरु21:4822:54रात
मंगल22:5400:00रात
सूर्य00:0001:07रात
शुक्र01:0702:13रात
बुध02:1303:19रात
चंद्र03:1904:26रात
शनि04:2605:32रात
गुरु05:3206:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2183° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।