28 नवंबर 2025 को ऋषिकेश का पंचांग

शुक्रवार, 28 नवंबर 2025, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 नवंबर 2025 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (00:15, 29 नव॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (02:49, 29 नव॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 17:16
रात 06:53 तक
तिथि
अष्टमी, 00:15 तक
नवमी
नक्षत्र
शतभिषा, 02:49 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 00:15, 29 नव॰ तक
शुक्ल नवमी 23:15, 29 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 02:49, 29 नव॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 02:22, 30 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:05 तक
हर्षण 09:27, 29 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:28 तक
बव 00:15, 29 नव॰ तक
बालव 11:51, 29 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
12:44
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:04
यमगंड
14:40 – 15:58
गुलिक काल
08:10 – 09:28

28 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:52 – 08:10सामान्य
लाभ08:10 – 09:28शुभ
अमृत09:28 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:04टालें
शुभ12:04 – 13:22शुभ
रोग13:22 – 14:40टालें
उद्वेग14:40 – 15:58टालें
चर15:58 – 17:16सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:16 – 18:58टालें
काल18:58 – 20:40टालें
लाभ20:40 – 22:22शुभ
उद्वेग22:22 – 00:05टालें
शुभ00:05 – 01:47शुभ
अमृत01:47 – 03:29शुभ
चर03:29 – 05:11सामान्य
रोग05:11 – 06:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5207:44दिन
बुध07:4408:36दिन
चंद्र08:3609:28दिन
शनि09:2810:20दिन
गुरु10:2011:12दिन
मंगल11:1212:04दिन
सूर्य12:0412:56दिन
शुक्र12:5613:48दिन
बुध13:4814:40दिन
चंद्र14:4015:32दिन
शनि15:3216:24दिन
गुरु16:2417:16दिन
मंगल17:1618:24रात
सूर्य18:2419:32रात
शुक्र19:3220:40रात
बुध20:4021:48रात
चंद्र21:4822:57रात
शनि22:5700:05रात
गुरु00:0501:13रात
मंगल01:1302:21रात
सूर्य02:2103:29रात
शुक्र03:2904:37रात
बुध04:3705:45रात
चंद्र05:4506:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2190° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।