9 फ़रवरी 2026 को ऋषिकेश का पंचांग

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:27, 10 फ़र॰ तक), नक्षत्र विशाखा (07:55, 10 फ़र॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 08:24 से 09:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 18:00
रात 07:01 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:27, 10 फ़र॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 07:55, 10 फ़र॰ तक
योग
वृद्धि 00:51, 10 फ़र॰ तक
ध्रुव 01:42, 11 फ़र॰ तक
करण
बालव 18:13 तक
कौलव 07:27, 10 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
तुला 01:11, 10 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
00:21
चंद्रास्त
10:58
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
08:24 – 09:46
यमगंड
11:08 – 12:31
गुलिक काल
13:53 – 15:15

9 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:01 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:46टालें
शुभ09:46 – 11:08शुभ
रोग11:08 – 12:31टालें
उद्वेग12:31 – 13:53टालें
चर13:53 – 15:15सामान्य
लाभ15:15 – 16:38शुभ
अमृत16:38 – 18:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:00 – 19:37सामान्य
रोग19:37 – 21:15टालें
काल21:15 – 22:53टालें
लाभ22:53 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 02:08टालें
शुभ02:08 – 03:45शुभ
अमृत03:45 – 05:23शुभ
चर05:23 – 07:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0107:56दिन
शनि07:5608:51दिन
गुरु08:5109:46दिन
मंगल09:4610:41दिन
सूर्य10:4111:36दिन
शुक्र11:3612:31दिन
बुध12:3113:26दिन
चंद्र13:2614:20दिन
शनि14:2015:15दिन
गुरु15:1516:10दिन
मंगल16:1017:05दिन
सूर्य17:0518:00दिन
शुक्र18:0019:05रात
बुध19:0520:10रात
चंद्र20:1021:15रात
शनि21:1522:20रात
गुरु22:2023:25रात
मंगल23:2500:30रात
सूर्य00:3001:35रात
शुक्र01:3502:40रात
बुध02:4003:45रात
चंद्र03:4504:51रात
शनि04:5105:56रात
गुरु05:5607:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2218° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।