17 अप्रैल 2026 को ऋषिकेश का पंचांग

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:21 तक), नक्षत्र रेवती (12:02 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 10:39 से 12:16 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:45
रात 05:47 तक
तिथि
अमावस्या, 17:21 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रेवती, 12:02 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 17:21 तक
शुक्ल प्रतिपदा 14:11, 18 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 12:02 तक
अश्विनी 09:42, 18 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 07:21 तक
विष्कंभअशुभ 03:45, 18 अप्रैल तक
प्रीति 23:56, 18 अप्रैल तक
करण
चतुष्पद 06:50 तक
नाग 17:21 तक
किंस्तुघ्न 03:48, 18 अप्रैल तक
बव 14:11, 18 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 12:02 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
05:20
चंद्रास्त
18:47
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
10:39 – 12:16
यमगंड
15:30 – 17:08
गुलिक काल
07:25 – 09:02

17 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:48 – 07:25सामान्य
लाभ07:25 – 09:02शुभ
अमृत09:02 – 10:39शुभ
काल10:39 – 12:16टालें
शुभ12:16 – 13:53शुभ
रोग13:53 – 15:30टालें
उद्वेग15:30 – 17:08टालें
चर17:08 – 18:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:45 – 20:07टालें
काल20:07 – 21:30टालें
लाभ21:30 – 22:53शुभ
उद्वेग22:53 – 00:16टालें
शुभ00:16 – 01:38शुभ
अमृत01:38 – 03:01शुभ
चर03:01 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4806:52दिन
बुध06:5207:57दिन
चंद्र07:5709:02दिन
शनि09:0210:07दिन
गुरु10:0711:11दिन
मंगल11:1112:16दिन
सूर्य12:1613:21दिन
शुक्र13:2114:26दिन
बुध14:2615:30दिन
चंद्र15:3016:35दिन
शनि16:3517:40दिन
गुरु17:4018:45दिन
मंगल18:4519:40रात
सूर्य19:4020:35रात
शुक्र20:3521:30रात
बुध21:3022:25रात
चंद्र22:2523:20रात
शनि23:2000:16रात
गुरु00:1601:11रात
मंगल01:1102:06रात
सूर्य02:0603:01रात
शुक्र03:0103:56रात
बुध03:5604:51रात
चंद्र04:5105:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2243° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।