9 दिसंबर 2026 को ऋषिकेश का पंचांग

बुधवार, 9 दिसंबर 2026, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 दिसंबर 2026 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (08:46, 10 दिस॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (21:00 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 12:08 से 13:25 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 17:16
रात 07:01 तक
तिथि
प्रतिपदा
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 21:00 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 08:46, 10 दिस॰ तक
नक्षत्र
मूल 23:58, 10 दिस॰ तक
योग
धृति 08:40 तक
शूलअशुभ 09:24, 10 दिस॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 19:32 तक
बव 08:46, 10 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
07:19
चंद्रास्त
17:18
दिनमान
10h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:06
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:29 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:08 – 13:25
यमगंड
08:18 – 09:35
गुलिक काल
10:52 – 12:08

9 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:01 – 08:18शुभ
अमृत08:18 – 09:35शुभ
काल09:35 – 10:52टालें
शुभ10:52 – 12:08शुभ
रोग12:08 – 13:25टालें
उद्वेग13:25 – 14:42टालें
चर14:42 – 15:59सामान्य
लाभ15:59 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:16 – 19:00टालें
शुभ19:00 – 20:43शुभ
अमृत20:43 – 22:26शुभ
चर22:26 – 00:09सामान्य
रोग00:09 – 01:52टालें
काल01:52 – 03:35टालें
लाभ03:35 – 05:18शुभ
उद्वेग05:18 – 07:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0107:52दिन
चंद्र07:5208:43दिन
शनि08:4309:35दिन
गुरु09:3510:26दिन
मंगल10:2611:17दिन
सूर्य11:1712:08दिन
शुक्र12:0813:00दिन
बुध13:0013:51दिन
चंद्र13:5114:42दिन
शनि14:4215:34दिन
गुरु15:3416:25दिन
मंगल16:2517:16दिन
सूर्य17:1618:25रात
शुक्र18:2519:34रात
बुध19:3420:43रात
चंद्र20:4321:51रात
शनि21:5123:00रात
गुरु23:0000:09रात
मंगल00:0901:18रात
सूर्य01:1802:26रात
शुक्र02:2603:35रात
बुध03:3504:44रात
चंद्र04:4405:53रात
शनि05:5307:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2333° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।