18 नवंबर 2027 को ऋषिकेश का पंचांग

गुरुवार, 18 नवंबर 2027, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 नवंबर 2027 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (23:27 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (01:52, 19 नव॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 13:21 से 14:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 17:19
रात 06:44 तक
तिथि
पंचमी, 23:27 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 01:52 तक
पुष्य
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 23:27 तक
कृष्ण षष्ठी 21:20, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 01:52, 19 नव॰ तक
पुष्य 00:27, 20 नव॰ तक
योग
साध्य 06:53 तक
शुभ 03:57, 19 नव॰ तक
शुक्ल 01:03, 20 नव॰ तक
करण
कौलव 12:31 तक
तैतिल 23:27 तक
गर 10:23, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 20:13 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
21:21
चंद्रास्त
10:48
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:50
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
13:21 – 14:40
यमगंड
06:44 – 08:03
गुलिक काल
09:22 – 10:42

18 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:44 – 08:03शुभ
रोग08:03 – 09:22टालें
उद्वेग09:22 – 10:42टालें
चर10:42 – 12:01सामान्य
लाभ12:01 – 13:21शुभ
अमृत13:21 – 14:40शुभ
काल14:40 – 15:59टालें
शुभ15:59 – 17:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:19 – 19:00शुभ
चर19:00 – 20:40सामान्य
रोग20:40 – 22:21टालें
काल22:21 – 00:02टालें
लाभ00:02 – 01:42शुभ
उद्वेग01:42 – 03:23टालें
शुभ03:23 – 05:04शुभ
अमृत05:04 – 06:44शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4407:37दिन
मंगल07:3708:29दिन
सूर्य08:2909:22दिन
शुक्र09:2210:15दिन
बुध10:1511:08दिन
चंद्र11:0812:01दिन
शनि12:0112:54दिन
गुरु12:5413:47दिन
मंगल13:4714:40दिन
सूर्य14:4015:33दिन
शुक्र15:3316:26दिन
बुध16:2617:19दिन
चंद्र17:1918:26रात
शनि18:2619:33रात
गुरु19:3320:40रात
मंगल20:4021:47रात
सूर्य21:4722:55रात
शुक्र22:5500:02रात
बुध00:0201:09रात
चंद्र01:0902:16रात
शनि02:1603:23रात
गुरु03:2304:30रात
मंगल04:3005:37रात
सूर्य05:3706:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2465° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।